अहमदाबाद में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का विरोध, NSUI ने दिखाए काले झंडे
नई दिल्ली: नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है। अहमदाबाद में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के दौरे के दौरान एनएसयूआई (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया और उन्हें काले झंडे दिखाए।
एक ओर जहाँ छात्र संगठन पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षा मंत्रालय उच्च शिक्षा में सुधार और भविष्य की योजनाओं (2047 के लक्ष्य) पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि मंत्रालय पेपर लीक जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
गुजरात के अहमदाबाद में कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई (NSUI) के सदस्यों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कड़ा विरोध किया। नीट-यूजी 2026 परीक्षा के पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शनकारियों ने मंत्री को काले झंडे दिखाए और उनके इस्तीफे की मांग की।
यह प्रदर्शन भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद (IIMA) के बाहर हुआ। धर्मेंद्र प्रधान वहां आईआईएम के समन्वय मंच की बैठक की अध्यक्षता करने पहुंचे थे। जब मंत्री की कार संस्थान से बाहर निकल रही थी, तब प्रदर्शनकारियों ने उन्हें काले झंडे दिखाए। गुजरात कांग्रेस के प्रवक्ता पार्थिवराजसिंह काठवाड़िया ने कहा कि पेपर लीक की जिम्मेदारी लेते हुए मंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।
नीट-यूजी 2026 की परीक्षा 3 मई को हुई थी। पेपर लीक के आरोपों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने मंगलवार को इसे रद्द कर दिया। इस मामले में अब तक केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। परीक्षा रद्द होने से करीब 22 लाख मेडिकल छात्र अनिश्चितता के बीच फंस गए हैं।
विरोध प्रदर्शन के बीच, शिक्षा मंत्री ने आईआईएम समन्वय मंच की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में उच्च शिक्षा विभाग, आईआईएम के अध्यक्ष, निदेशक और गुजरात व उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य विकसित भारत 2047 के निर्माण में आईआईएम की भूमिका पर चर्चा करना था।
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बैठक में छात्र कल्याण, शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसे विषयों पर बात हुई। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आईआईएम राष्ट्र निर्माण और आर्थिक बदलाव के लिए मजबूत माध्यम बनकर उभरे हैं। उन्होंने कहा कि ये संस्थान वैश्विक स्तर पर नेतृत्व और प्रबंधन शिक्षा के मॉडल बन गए हैं।
अहमदाबाद में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री और उच्च शिक्षा सचिव ने आईआईएम (IIMs) के प्रशासनिक और शैक्षणिक ढांचे में सुधार के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं।एमबीए (MBA) में दाखिले के लिए एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने पर सहमति बनी है, ताकि पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित रहे। छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए फीस वापसी की स्पष्ट नीति और एक संस्थान से दूसरे आईआईएम में तबादले (माइग्रेशन) की सुविधा देने पर भी गंभीर चर्चा हुई।
फैकल्टी और अन्य गैर-शिक्षण पदों के लिए आरक्षण रोस्टर को कड़ाई से लागू करने पर विचार-विमर्श किया गया।
नए और प्रतिभावान शिक्षकों (युवा फैकल्टी) को करियर में आगे बढ़ने के बेहतर अवसर प्रदान करने पर जोर दिया गया है।उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी ने जोर दिया कि सभी प्रबंधन संस्थानों को अलग-थलग काम करने के बजाय आपसी तालमेल और सहयोग (Collaboration) को बढ़ाना चाहिए, ताकि संसाधनों और ज्ञान का आदान-प्रदान हो सके
एक ओर जहाँ नीट मामले पर विरोध प्रदर्शन जारी है, वहीं शिक्षा मंत्रालय आईआईएम जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता, सामाजिक न्याय (आरक्षण) और छात्र-अनुकूल नीतियों के माध्यम से प्रशासनिक सुधारों को गति देने में जुटा है।
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