निशाने पर शिक्षा व्यवस्था: राहुल गांधी का प्रधानमंत्री पर बड़ा आरोप
नई दिल्ली: संसद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सामाजिक बराबरी और न्याय के विरोध में काम करने का आरोप मढ़ा है।
उनका कहना है कि मौजूदा केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था में इस तरह के बदलाव कर रही है, जिससे विद्यार्थियों की अपनी समझ से सोचने और सवाल पूछने की ताकत कमजोर हो सकती है।
एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद तुरंत जागा शिक्षा मंत्रालय
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह गंभीर दावा किया कि एक गुमनाम सोशल मीडिया पोस्ट में डॉ. बी.आर. आंबेडकर की पुस्तक ‘जाति का विनाश’ और ज्योतिबा फुले की ‘गुलामगिरी’ सहित कई महत्वपूर्ण पुस्तकों को युवाओं के दिमाग में ‘‘जहर’’ घोलने वाला बताया गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस पोस्ट के सामने आने के ठीक अगले दिन, यानी रविवार को प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर शिक्षा मंत्रालय ने तुरंत सक्रियता दिखाई।
रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने 27 सितंबर को देश के कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार को एक ईमेल भेजा था।
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इस ईमेल में संबंधित पाठ्यक्रमों में पढ़ रहे विद्यार्थियों के नामांकन का विस्तृत विवरण मांगा गया था और उस विशेष ‘एक्स’ पोस्ट को लेकर विश्वविद्यालयों की टिप्पणियां भी तलब की गई थीं, जिसमें पीएमओ से प्राप्त संचार का स्पष्ट उल्लेख किया गया था।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि सरकार मौजूदा शिक्षा प्रणाली को पसंद नहीं करती है, क्योंकि वह युवाओं को खुलकर सोचने और सवाल पूछने की आजादी नहीं देना चाहती।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब पेपर लीक, बेरोजगारी और सुरक्षा जैसे युवाओं से जुड़े बड़े संकट सामने आते हैं, तब प्रधानमंत्री पूरी तरह शांत रहते हैं, लेकिन इंटरनेट पर ट्रोल करने वालों की बातों पर वे तुरंत कदम उठा लेते हैं।
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