फॉर्म 6 पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद चुनाव आयोग पर कसा शिकंजा

फॉर्म 6 पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद चुनाव आयोग पर कसा शिकंजा

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी से सियासी हड़कंप मच गया है।

अदालत ने साफ किया कि उसने नए मतदाताओं के नाम जोड़ने वाले ‘फॉर्म 6’ में किसी भी तरह के बदलाव को अपनी मंजूरी नहीं दी थी।

इस खुलासे के तुरंत बाद कांग्रेस और CJP ने तीखा रुख अपनाते हुए CEC पर देश को गुमराह करने और झूठ बोलने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

जयराम रमेश का तीखा वार

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह साफ और स्पष्ट है कि सीईसी ने झूठ बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीईसी ने जानबूझकर फॉर्म 6 में बदलाव किया ताकि जेन-जी (Gen Z) वोटरों के नाम हटाए जा सकें, क्योंकि मौजूदा सरकार उनसे बुरी तरह डरी हुई है।

वहीं, याचिकाकर्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की वकील मेनका गुरुस्वामी ने अदालत को बताया कि नए मतदाताओं को जोड़ने वाले ‘फॉर्म 6’ में बदलाव किए गए हैं।

इस पर संज्ञान लेते हुए सीजेआई ने नोटिस जारी किया और कहा कि रिकॉर्ड सामने आने पर यह देखा जाएगा कि यह बदलाव किसने और कैसे किया।

सीजेपी के संयोजक अभिजीत दीपके और संस्थापक सदस्य सौरव दास ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाया। सौरव दास ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस बयान ने ज्ञानेश कुमार को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को अपनी प्रेस रिलीज में यह दावा किया था कि “एसआईआर (SIR) के लिए फॉर्म 6 के साथ लगे डिक्लेरेशन को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है,” लेकिन सीजेआई के ताजा बयान ने इस दावे की पोल खोल दी है।

विपक्ष और कई संगठनों का आरोप है कि ‘फॉर्म 6’ में पूर्वजों की जानकारी जैसी शर्तें अवैध रूप से जोड़ी गई, जिससे युवाओं को नया वोटर आईडी बनवाने में काफी दिक्कत हो रही है।

हालांकि, चुनाव आयोग ने सफाई दी थी कि मुख्य फॉर्म नहीं बदला गया, बल्कि सिर्फ एक अस्थारी घोषणा पत्र जोड़ा गया है। इसके बावजूद, सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद अब चुनाव आयोग के तरीकों पर उठ रहे सवाल और ज्यादा गहरे हो गए हैं।


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Mehak B