खर्ग द्वीप पर अमेरिकी हमला: तेल ठिकानों को बख्शने के पीछे ट्रंप का क्या है गेम प्लान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान के मायने यह हैं कि अमेरिका वैश्विक अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए फिलहाल फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है, लेकिन भविष्य में ईरान को पूरी तरह घुटनों पर लाने के लिए उसने सैन्य नियंत्रण के सख्त विकल्प को भी खुला रखा है
नई दिल्ली (इंटरनेशनल डेस्क):अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में दावा किया है कि उन्होंने अमेरिकी सेना को ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण खर्ग द्वीप पर स्थित तेल प्रतिष्ठानों को निशाना न बनाने का निर्देश दिया था।
फॉक्स न्यूज से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने खर्ग द्वीप पर दो से तीन बार हमले जरूर किए, लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले इसके बुरे असर को देखते हुए तेल प्रतिष्ठानों को जानबूझकर इन हमलों से दूर रखा गया।
हालांकि, ट्रंप ने भविष्य के लिए किसी भी संभावना को खारिज नहीं किया है। उन्होंने साफ किया कि वह ईरान में एक सीमित जमीनी सैन्य अभियान चलाने या आने वाले समय में इस प्रमुख द्वीप पर पूरी तरह नियंत्रण हासिल करने की संभावना से इनकार नहीं करते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने सेना को निर्देश दिया था कि वे बाकी सब कु पर इसका कोई बुरा असर नहीं चाहते थे, जो कि दुनिया की अर्थव्यवस्था का एक बेहद अहम हिस्सा है।
हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि अमेरिका चाहे छ निशाना बनाएं, लेकिन तेल प्रतिष्ठानों को हाथ न लगाएं।
ट्रंप के अनुसार, उन्होंने उस छोटे से हिस्से को जानबूझकर छोड़ने को कहा क्योंकि वह वैश्विक अर्थव्यवस्थातो भविष्य में इन तेल प्रतिष्ठानों पर हमला कर सकता है।
ट्रंप ने आगे कहा कि भले ही अमेरिका ने अब तक उन्हें निशाना नहीं बनाया है और किसी भी समय ऐसा किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल उन्हें इसकी संभावना काफी कम लगती है।
खर्ग द्वीप पर पूरी तरह नियंत्रण करने के सवाल पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोई सीधा और साफ जवाब देने से परहेज किया है।
इंटरव्यू के दौरान जब पत्रकार ने उनके 1988 के उस पुराने बयान की याद दिलाई, जिसमें उन्होंने किसी भी अमेरिकी सैनिक या जहाज पर हमला होने की सूरत में खर्ग द्वीप पर कब्जा करने की बात कही थी, तो ट्रंप ने कहा कि वह इस बारे में अभी कुछ भी नहीं कह सकते, क्योंकि ऐसा करना समझदारी नहीं होगी।
हालांकि, उन्होंने यह संकेत जरूर दे दिया कि अगर भविष्य में ईरान की सैन्य क्षमता को और ज्यादा कमजोर कर दिया जाता है, तो इस रणनीतिक द्वीप पर कब्जे की संभावना पर विचार किया जा सकता है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह सीमित स्तर पर जमीनी सैन्य अभियान की संभावना को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा कि वह ऐसी किसी संभावना से मना नहीं करना चाहते, क्योंकि कभी-कभी जमीनी अभियानों की जरूरत पड़ ही जाती है।
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ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका के पास ऐसे लोग हैं जो उनकी ओर से इस तरह का अभियान चलाएंगे, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका इशारा किन सैन्य बलों या अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों की तरफ था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सैन्य अभियानों से ईरान को इतना भारी नुकसान पहुंचा है कि उसे इससे पूरी तरह उबरने में करीब 20 साल का समय लग जाएगा।
इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि अमेरिकी हमले तब तक जारी रहेंगे, जब तक वह खुद उन्हें रोकने का फैसला नहीं ले लेते।
गौरतलब है कि खर्ग द्वीप फारस की खाड़ी में ईरान के तट के पास स्थित है और लंबे समय से देश के कच्चे तेल के निर्यात का सबसे प्रमुख केंद्र रहा है।
इस रणनीतिक द्वीप पर होने वाला किसी भी तरह का हमला अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है, जिसका सीधा असर भारत समेत एशिया के तमाम प्रमुख तेल आयातक देशों पर पड़ना तय है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि फॉक्स न्यूज को दिए गए उनके इंटरव्यू से महज एक घंटे पहले ईरानी प्रतिनिधियों ने अमेरिका से संपर्क साधा था और संकेत दिया था कि तेहरान अब समझौता करने के लिए तैयार है।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका की तरफ से ईरान पर लगातार हमले किए जा रहे हैं।
ट्रंप ने बताया कि व्हाइट हाउस में इस इंटरव्यू के शुरू होने से कुछ ही देर पहले उनके प्रतिनिधियों की ईरानी अधिकारियों से बातचीत हुई थी।
जब उनसे यह सवाल किया गया कि उन्होंने खुद आखिरी बार किसी ईरानी अधिकारी से कब बात की थी, तो ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सीधे तो कोई बातचीत नहीं की है, लेकिन उनके प्रतिनिधि लगातार संपर्क में हैं और वास्तव में इंटरव्यू से करीब एक घंटे पहले भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि फॉक्स न्यूज को दिए गए उनके इंटरव्यू से महज एक घंटे पहले ईरानी प्रतिनिधियों ने अमेरिका से संपर्क साधा था और संकेत दिया था कि तेहरान अब समझौता करने के लिए तैयार है।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका की तरफ से ईरान पर लगातार हमले किए जा रहे हैं।
ट्रंप ने बताया कि व्हाइट हाउस में इस इंटरव्यू के शुरू होने से कुछ ही देर पहले उनके प्रतिनिधियों की ईरानी अधिकारियों से बातचीत हुई थी।
जब उनसे यह सवाल किया गया कि उन्होंने खुद आखिरी बार किसी ईरानी अधिकारी से कब बात की थी, तो ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सीधे तो कोई बातचीत नहीं की है, लेकिन उनके प्रतिनिधि लगातार संपर्क में हैं और वास्तव में इंटरव्यू से करीब एक घंटे पहले भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई थी।
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