केपीएससी भर्ती घोटाले में हाईकोर्ट के एसआईटी आदेश पर सरकार का संकेत
बेंगलुरु: कर्नाटक हाई कोर्ट ने KPSC भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एसआईटी SIT गठित करने का निर्देश दिया है, जबकि मंत्री प्रियंक खरगे ने मौजूदा सीआईडी जांच का बचाव किया है। मंत्री का कहना है कि सीआईडी की जांच में कोई चूक नहीं पाई गई है और सार्वजनिक हुईं कई जानकारियां उसी जांच का परिणाम हैं। अधिक जानकारी के लिए संबंधित समाचार स्रोतों का अवलोकन करें।
मंत्री प्रियंक खरगे ने भर्ती घोटाले की जांच कर रही सीआईडी (CID) पर उठे सभी सवालों को सिरे से खारिज कर दिया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी की तरफ से अब तक किसी भी प्रकार की लापरवाही या चूक सामने नहीं आई है, बल्कि इस मामले से जुड़ी जितनी भी अहम जानकारियां बाहर आई हैं, वे सब सीआईडी की कड़ी जांच की वजह से ही संभव हो पाई हैं।
प्रियंक खरगे ने आगे कहा कि सरकार इस पूरे मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का बारीकी से अध्ययन करेगी और उसके बाद ही अपना अगला कानूनी कदम तय करेगी।
KPSC भर्ती घोटाला
इस बीच हाईकोर्ट ने वरिष्ठ IPS अधिकारी आलोक कुमार की अगुवाई में पांच सदस्यीय SIT गठित करने का निर्देश दिया है।
टीम को KPSC में पशु चिकित्सा अधिकारियों समेत अन्य भर्तियों में कथित अनियमितताओं की जांच करनी है। अदालत ने जांच पूरी करने के लिए 100 दिन की समयसीमा तय की है और हर 30 दिन में प्रगति रिपोर्ट देने को कहा है।
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यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि इसमें केवल एक भर्ती नहीं बल्कि पेपर लीक, ओएमआर शीट से छेड़छाड़ और पक्षपात जैसे कई गंभीर आरोप शामिल हैं।
इस पूरे प्रकरण में वित्तीय लेनदेन की अलग से जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की जा रही है। अधिक जानकारी के लिए आप संबंधित समाचार स्रोतों का अवलोकन कर सकते हैं।
प्रियंक खरगे का केंद्र पर हमला
KPSC विवाद के बीच बीजेपी के विरोध प्रदर्शन पर पलटवार करते हुए मंत्री प्रियंक खरगे ने केंद्र सरकार से मिलने वाली वित्तीय मदद का मुद्दा उठाया है। उन्होंने याद दिलाया है कि लरनतक को पहले भी आपदा रहत राशि के लिए केंद सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ा था।
प्रियंक खरगे नेNDRF) के नियमों और सूखा राहत कोष को लेकर भी केंद्र की नीतियों पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। कुल मिलाकर कर्नाटक का यह के पीएससी मामला अब भर्ती में गड़बड़ी, जांच एजेंसियों की भूमिका और राज्य बनाम केंद्र की बड़ी राजनीतिक जंग में तब्दील हो चुका है जिसकी असल सक्ष्छ्चाई आने आंवले दिनों में SIT) की जांच से ही साफ हो पाएगी।
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