चुनाव आयुक्तों के बीच की चर्चा पर आयोग बोला- सभी फैसले मिलकर तय किए गए

चुनाव आयुक्तों के बीच की चर्चा पर आयोग बोला- सभी फैसले मिलकर तय किए गए

नई दिल्ली: ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और आयोग के काम करने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए है।

विपक्ष के इन आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने, 23 सितंबर 2026 को एक बयान जारी कर सफाई दी है कि संस्था के अंदर अलग-अलग राय होना एक सामान्य बात है, लेकिन सभी अंतिम फैसले सबकी सहमति से ही लिए गए है।

तीनों चुनाव आयुक्तों को राय रखने का पूरा अधिकार

चुनाव आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत काम करने वाली एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है, जिसके भीतर लिखित नोट, आपसी चर्चा और आंतरिक चेक एंड बैलेंस की व्यवस्था सुचारू रूप से चलती है।

आयोग के अनुसार, निर्णय प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग राय आना और अधिकारियों या सदस्यों द्वारा अपने सुझाव या आपत्तियां दर्ज कराना पूरी तरह सामान्य बात है।

आयोग ने यह भी साफ किया कि तीनों चुनाव आयुक्तों को अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है, इसलिए आंतरिक चर्चा के दौरान सामने आए कुछ नोटों को अंतिम फैसलों से जोड़कर पेश करना और पूरी तस्वीर को नजरअंदाज करना सही नहीं है।

आयोग ने दावा किया कि पिछले 10 महीनों के दौरान देश भर में लागू किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान समेत करीब 40 नई पहल और महत्वपूर्ण चुनाव सुधार किए गए हैं, और ये सभी कदम पूरे आयोग की सर्वसम्मति से उठाए गए हैं।

अपने आधिकारिक आदेशों का बचाव करते हुए चुनाव आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324 के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 का हवाला दिया।

आयोग ने कहा कि आंतरिक स्तर पर किसी प्रस्ताव पर सवाल उठने और कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए जाने वाले अंतिम निर्णय के बीच के अंतर को समझना जरूरी है, क्योंकि सभी आदेश निर्धारित नियमों के तहत ही जारी होते हैं।

चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया है। आयोग का कहना है कि यह सारा काम स्थानीय चुनाव अधिकारी (ERO और DEO) अपने कानूनी अधिकारों के तहत करते है।

इसके साथ ही, आयोग ने भरोसा दिलाया है कि उनका डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘ECINet’ पूरी तरह सुरक्षित है और इसका डेटा सुरक्षित रहता है। बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के हालिया चुनावों का उदाहरण देते हुए आयोग ने कहा कि वह अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से निभा रहा है।


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Mehak B