आयुष मलिक की घर वापसी पर हाईकोर्ट के ब्रेक, धर्म परिवर्तन को लेकर दिया बड़ा फैसला
नई दिल्ली: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आयुष मलिक की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को बंद करते हुए अपनी मर्जी से जीने की पूरी आजादी दे दी है। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप जैन ने साफ तौर पर कहा कि आयुष मलिक पूरी तरह बालिग हैं और अपने जीवन से जुड़े फ़ैसले खुद लेने के लिए सवतंत्र हैं।
कानूनी विवाद के दौरान ‘एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स’ नाम की संस्था ने आयुष मलिक को कोर्ट में पूरी कानूनी मदद और सहायता पहुंचाई थी।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता बहाल और स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन का बयान
इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए शामली के दवा कारोबारी के बेटे आयुष मलिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता बहाल कर दी गई है क्योंकि अदालत के समक्ष आयुष ने स्पष्ट किया कि उन्होंने 2014 में अपनी इच्छा से बिना किसी दबाव या प्रलोभन के इस्लाम अपनाया था।
और चांदनी कुरैशी से विवाह करने की इच्छा जताते हुए बालिग होने के नाते अपनी अंतरात्मा के अनुसार धर्म तथा जीवनसाथी चुनने का संवैधानिक अधिकार जताया है।
जबकि इस वर्ष जून में पिता देवराज मलिक की शिकायत पर पुलिस द्वारा चांदनी व उनके पिता इस्लाम कुरैशी को साजिशन धर्म परिवर्तन के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के बाद आयुष को अपनी पसंद की जगह पर स्वतंत्र रूप से रहने और वैवाहिक संबंध पर कानून के मुताबिक फैसला लेने की पूरी आजादी दे दी गई है।
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पुलिस कस्टडी से मुक्ति और विवाह की आजादी
शामली के दवा कारोबारी के बेटे आयुष मलिक द्वारा अदालत के फैसले के बाद अपनी धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता बहाल होने की बात कहे जाने तथा पिता देवराज मलिक द्वारा कोर्ट का आदेश मानने का बयान देने के साथ ही, वकील उमर खालिद के अनुसार हाईकोर्ट ने आयुष को पुलिस कस्टडी से मुक्त कर स्वतंत्र रूप से अपनी पसंद के अनुसार जीने, धर्म मानने और चांदनी कुरैशी से विवाह करने की पूरी आजादी दे दी है।
जबकि इससे पहले जून में पिता की शिकायत पर साजिशन धर्म परिवर्तन और संपत्ति हड़पने के आरोप में चांदनी व उनके पिता की गिरफ्तारी के बाद आयुष ने वायरल वीडियो को भावनात्मक दबाव में बनवाया गया बताया था और पुलिस ने चांदनी सहित अन्य पर मुकदमा दर्ज किया था।
धार्मिक पहचान को लेकर चल रहे पारिवारिक विवाद पर आयुष मालिक ने साफ किया की उनका परिवार इस फैसले से नाराज है और उन पर वापस हिंदू बनने का दबाव बना रहा है। आयुष का कहना है की वे अपने परिवार से अलग नहीं है लेकिन साथ रहने के लिए हिंदू होना जरुरी है और वे अपनी नहीं पहचान के साथ भी रिश्ता निभा सकते है।
दूसरी तरफ उनके पिता देवराज मालिक का दवा है की उनके बेटे और चांदनी कुरेशी का निकाहनामा पूरी तरह फर्जी है जिसे क़रीब चार साल पहले तैयार कराया गया था। हालाँकि आयुष ने मीडिया के सामने स्पष्ट किया की उन्होंने अपनी मर्जी से निकाह किया था और फिलहाल पुलिस इस निकाहनामे की सच्चाई का पता लगाने में जुटी है।
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