भूख हड़ताल पर हाई कोर्ट सख्त; कल तक मांगा वांगचुक की सेहत पर जवाब
सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे हैं। यहां उनके भूख हड़ताल को 18 दिन हो चुके हैं। वे कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक के समर्थन में अनशन पर बैठे हैं
नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है।
बीती 28 जून से आमरण अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को लेकर हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है, जिस पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर कल तक जवाब मांगा है।
यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और वकील राकेश कुमार सैनी द्वारा दाखिल की गई है। याचिका में कोर्ट से केंद्र और दिल्ली सरकार को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वांगचुक को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया जाए और उनकी जान बचाने के लिए जरूरत पड़ने पर उन्हें जबरन भोजन (फोर्स-फीडिंग) दिया जाए।

सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल करते हुए 18 दिन हो चुके हैं। वह ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के संस्थापक के समर्थन में अनशन पर बैठे हैं, जो नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों से लाखों छात्रों के प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
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इस लंबे अनशन के कारण वांगचुक की सेहत लगातार बिगड़ रही है, जिससे उनके समर्थकों में चिंता बनी हुई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका शरीर बेहद कमजोर हो गया है, मांसपेशियों में गंभीर दर्द है और उनका वजन भी 8.5 किलोग्राम तक कम हो चुका है, जबकि उनका ब्लड प्रेशर 109/70 दर्ज किया गया है।
हजारों समर्थकों की अपील के बावजूद वे अनशन खत्म न करने के फैसले पर अडिग हैं।
इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी ने घोषणा की है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर वह संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, यानी 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक एक शांतिपूर्ण मार्च निकालेगी।
संगठन ने इस मार्च में शामिल होने के लिए देश भर के छात्रों, अभिभावकों और आम नागरिकों से अपील की है।
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