हाईकोर्ट का यूपी सरकार को आदेश: तय समय पर ही कराएं पंचायत चुनाव, 13 जुलाई तक दें पूरी रिपोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को झटका देते हुए कहा है कि ग्राम प्रधान प्रशासक नहीं बन सकते और सरकार को चुनाव की रूपरेखा पेश करने का आदेश दिया है
इलाहाबाद: हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायतों के खत्म हो रहे कार्यकाल को बढ़ाकर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव टालने की उत्तर प्रदेश सरकार की कवायद को बड़ा झटका दिया है।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने सहारनपुर निवासी अरविंद राठौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को 13 जुलाई तक चुनाव की रूपरेखा पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि पहले ही असांविधानिक घोषित हो चुके नियमों के तहत ग्राम प्रधान प्रशासक की भूमिका नहीं निभा सकते हैं।
अदालत ने पंचायत राज विभाग के प्रमुख सचिव से हलफनामे के माध्यम से स्पष्टीकरण मांगा है कि किन परिस्थितियों में इस अस्तित्वहीन प्रावधान के तहत प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया गया, और ऐसा न करने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होने की चेतावनी दी है।
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 243-ई और 243-के के तहत पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता और समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है।
सुनवाई के दौरान राज्य चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि 10 जून 2026 को मतदाता सूची प्रकाशित की जा चुकी है और आयोग चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन सरकार की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं न मिलने के कारण प्रक्रिया रुकी हुई है।
दूसरी ओर, राज्य सरकार ने दलील दी कि पिछड़ा वर्ग आयोग जिलों में ओबीसी आबादी का आंकड़ा जुटाकर आरक्षण तय कर रहा है, जिसके कारण समय लग रहा है। गौरतलब है कि प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो चुका है, जबकि क्षेत्र और जिला पंचायतों का कार्यकाल जुलाई में खत्म होने वाला है।
सरकार ने 25 और 26 मई के शासनादेशों के जरिए प्रदेश के 57,694 ग्राम प्रधानों को छह माह के लिए प्रशासक बनाकर विकास कार्य संचालित करने की मंजूरी दी थी, जिसे हाईकोर्ट ने पूर्व के एक फैसले (प्रेम लाल पटेल मामला) का हवाला देते हुए अवैध माना है।
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