सिंधु जल संधि: आतंकवाद खत्म होने तक सहयोग असंभव
पाकिस्तान के लंबे समय से जारी सीमा पार आतंकवाद और शत्रुतापूर्ण रवैये के कारण भारत ने आपसी विश्वास को तोड़ चुके सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया है
नई दिल्ली(इंटरनेशनल डेस्क): अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने ‘न्यूजवीक’ में लिखे लेख में कहा है कि सिंधु जल संधि आपसी सद्भावना और विश्वास पर आधारित थी, जिसे पाकिस्तान के लंबे समय के रवैये और सीमा पार आतंकवाद ने कमजोर कर दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का संधि को स्थगित रखने का फैसला केवल उस वास्तविकता को स्वीकार करना है, जिसे पाकिस्तान के आचरण ने पहले ही नष्ट कर दिया था।
क्वात्रा ने बताया कि 1960 की इस संधि के तहत भारत को केवल 20% और पाकिस्तान को 80% पानी का अधिकार मिला।
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इस असंतुलन और भारत के विकास में बाधा के बावजूद भारत ने संधि का सम्मान किया, जबकि जवाब में पाकिस्तान ने 1965, 1971, 1999 के युद्धों के साथ-साथ संसद, मुंबई, उरी, पठानकोट, पुलवामा और पहलगाम जैसे कई आतंकी हमलों को अंजाम दिया।
राजदूत ने कहा कि यदि पाकिस्तान द्विपक्षीय सहयोग चाहता है, तो उसे सबसे पहले अपना आतंकी ढांचा खत्म करना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान में जल संकट का कारण भारत नहीं, बल्कि उसकी अपनी खराब जल प्रबंधन प्रणाली है और हर घरेलू विफलता के लिए भारत को दोषी ठहराने की उसकी आदत पुरानी हो चुकी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रुख को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि “आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते” तथा “पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।”
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