महंगाई का झटका: FMCG उत्पादों के दाम 10% तक बढ़ेंगे, बिगड़ेगा बजट
नई दिल्ली। भारत में एफएमसीजी सेक्टर इस समय गंभीर मुद्रास्फीति के दबाव से जूझ रहा है, जिसका सीधा असर आम जनता की रसोई और मासिक बजट पर पड़ने वाला है। हिंदुस्तान यूनिलीवर, ब्रिटानिया, डाबर और नेस्ले जैसी दिग्गज कंपनियों ने कच्चे माल और ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने या वजन घटाने के स्पष्ट संकेत दिए हैं।
इस संकट की सबसे बड़ी वजह वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव है, जिससे माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स का खर्च बढ़ गया है। इसके साथ ही पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक और लैमिनेट्स की कीमतों में भी भारी उछाल आया है, जिसने साबुन, डिटर्जेंट और बिस्कुट जैसे उत्पादों की उत्पादन लागत को बढ़ा दिया है।
कंपनियां इस बढ़ती लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने की तैयारी कर रही हैं, जिसके तहत पर्सनल केयर उत्पादों और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों की कीमतों में 3% से 5% तक की वृद्धि देखी जा सकती है। कई कंपनियां ‘श्रिंकफ्लेशन’ का रास्ता भी अपना रही हैं, जहां ₹5 या ₹10 जैसे लोकप्रिय प्राइस पॉइंट्स को बरकरार रखने के लिए पैकेट के अंदर मौजूद सामान का वजन (ग्रामेज) कम किया जा रहा है। उदाहरण के लिए, जिस बिस्कुट के पैकेट में पहले 100 ग्राम माल आता था, अब उसी कीमत पर वह 85 से 90 ग्राम तक सिमट सकता है।
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डाबर और ब्रिटानिया जैसी कंपनियों ने स्वीकार किया है कि इनपुट कॉस्ट में 10% से 20% तक की बढ़ोतरी हुई है, जिसे संभालना अब उनके लिए मुश्किल हो रहा है। नेस्ले ने भी वर्तमान स्थिति को एक चेतावनी की तरह बताया है। कुल मिलाकर, आने वाले समय में साबुन, शैम्पू, चाय, बिस्कुट और राशन के अन्य जरूरी सामान महंगे होने से मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए घरेलू बजट का प्रबंधन करना एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।
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