ईरान संघर्ष का असर: मध्य अमेरिकी रूट की ओर मुड़े दुनिया के मालवाहक जहाज
नई दिल्ली(इंटरनेशनल डेस्क)। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी ढंग से बंद किए जाने के बाद वैश्विक शिपिंग और लॉजिस्टिक्स के समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं. मई 2026 की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, इस संकट ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों में एक “भूकंपीय बदलाव” ला दिया है, जिसका सबसे बड़ा फायदा पनामा नहर को मिल रहा है.
होर्मुज स्ट्रेट को ईरान की ओर से बंद किए जाने के बाद जहां पूरी दुनिया की शिपिंग लाइन प्रभावित हुई है. वहीं विक्लिप रूट इसका पूरा फायदा उठा रहे हैं. फाइनेंशियल टाइम्स ने रविवार को बताया कि ईरान युद्ध की वजह से होर्मुज में रुकावट के बाद ज्यादा जहाज सेंट्रल अमेरिकी सी रूट की ओर मुड़ रहे हैं.
जिससे पनामा नहर की कमाई में 15 फीसद तक की बढ़ोतरी हुई. पनामा नहर के CFO विक्टर वियल ने FT को बताया कि फरवरी के आखिर में जब से यह संघर्ष शुरू हुआ है, तब से रोजाना होने वाले जहाजों के आवागमन में 20 फीसद तक की बढ़ोतरी हुई है.
वियल ने कहा, “हमारी बिक्री में निश्चित रूप से बढ़ोतरी हुई है. संघर्ष से पहले हमारे यहां रोजाना 34 जहाजों का आवागमन होता था. अब औसतन 38 जहाज आते-जाते हैं और कुछ दिन तो ऐसे भी होते हैं जब 40 या 41 जहाजों का आवागमन होता है.” बता दें, एशियाई ट्रेडर्स तेल, ईंधन और कोयले जैसी सूखी थोक चीजों की तलाश में हैं, ये चीजें अक्सर अमेरिका गल्फ कोस्ट से इस जलमार्ग के जरिए भेजी जाती हैं.
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इस वजह से पनामा नहर की लेन की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं. पिछले महीने एक गैस टैंकर ने नहर पार करने के लिए 4 मिलियन डॉलर का भुगतान किया था, हालांकि वियल ने कहा कि ज़्यादातर मामलों में यह कीमत एक मिलियन डॉलर से कम ही रही है.
वियल ने कहा कि पनामा नहर के अपने कुछ खर्चों, जिनमें ओवरटाइम भी शामिल है, में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन माल की आवाजाही में बढ़ोतरी और नीलामी की कीमतों में मिले प्रीमियम से पता चलता है कि राजस्व में वृद्धि लगभग 10 से 15 फीसद के बीच रहने वाली है, लेकिन हम देखेंगे कि यह स्थिति कब तक बनी रहती है.
पनामा नहर ने 1 अक्टूबर 2024 से 30 सितंबर 2025 तक के वित्त वर्ष में 5.71 बिलियन डॉलर के रेवेन्यू पर 4.1 बिलियन डॉलर का शुद्ध मुनाफा कमाया. सितंबर 2026 में खत्म होने वाले वित्त वर्ष के लिए मौजूदा रेवेन्यू का अनुमान 5.8 बिलियन है, जो संघर्ष की वजह से बढ़ी हुई मांग और अमेरिकी टैरिफ के उम्मीद से कम असर को दिखाता है. इस साल की पहली छमाही में, पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले शुद्ध कमाई 12 फीसद बढ़कर 2.3 बिलियर डॉलर हो गई, जबकि रेवेन्यू 3 बिलियन है.
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