ईरान फिर शुरू कर रहा परमाणु कार्यक्रम? मोसाद के दावे से बढ़ा तनाव
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए अमेरिका और इजरायल इसे रोकने की लगातार मांग कर रहे हैं
इजरायल: एक बार फिर दावा किया है कि ईरान पर्दे के पीछे अपना परमाणु कार्यक्रम जारी रख सकता है।
इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद का मानना है कि ईरान ने पिछले साल अपने यूरेनियम-संवर्धन सेंट्रीफ्यूज को ‘पिकएक्स माउंटेन’ (माउंट कोलांग) के नीचे बनी गहरी सुरक्षित सुरंगों में स्थानांतरित कर दिया था, जहां से तेहरान दोबारा अपना परमाणु कार्यक्रम शुरू कर सकता है।
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर लगातार किए जा रहे हमलों के बीच यह दावा सामने आया है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल जून में 12 दिनों तक चले इजरायल-ईरान संघर्ष के बाद तेहरान ने ये कदम उठाया था, जिसकी जानकारी इजरायल ने अमेरिका के साथ भी साझा की है।
पिकएक्स माउंटेन ईरान के नतांज यूरेनियम संवर्धन केंद्र के पास स्थित एक बेहद सुरक्षित परिसर है, जिसमें दो गहरी भूमिगत सुरंग प्रणालियां हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये सुरंगें अमेरिका के सबसे शक्तिशाली ‘बंकर-बस्टर’ बमों की पहुंच से भी बाहर हैं।
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ईरान ने इसे 2020 में तबाह हुए अपने सेंट्रीफ्यूज असेंबली केंद्र के विकल्प के रूप में तैयार किया था।
हालांकि पिछले साल की जंग में इसे प्राथमिक निशाना नहीं बनाया गया था, लेकिन इजरायल के अनुसार पिछले 15 महीनों से यहां संदिग्ध गतिविधियां जारी हैं।
वहीं, इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी का कहना है कि पिकएक्स साइट पर भारी ट्रकों की आवाजाही, सुरंगों को मजबूत करने का काम और व्यापक बुनियादी ढांचे का निर्माण देखा गया है।
इजरायली अधिकारियों और विशेषज्ञों को डर है कि ईरान इन अभेद्य सुरंगों का इस्तेमाल परमाणु उपकरण छिपाने या हथियार-ग्रेड यूरेनियम संवर्धन की छोटी सीक्रेट यूनिट स्थापित करने के लिए कर सकता है, इसलिए इजरायल इन ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई का दबाव बना रहा है।
उल्लेखनीय है कि सेंट्रीफ्यूज ऐसी मशीनें हैं जो यूरेनियम को संवर्धित करती हैं, जिसका उपयोग नागरिक ऊर्जा के साथ-साथ परमाणु हथियार बनाने में भी होता है।
दूसरी ओर, अमेरिका और इजरायल के इन सभी आरोपों व दावों को खारिज करते हुए ईरान ने लगातार यही कहा है कि उसका परमाणु हथियार बनाने का कोई इरादा नहीं है और उसका यह कार्यक्रम पूरी तरह से नागरिक ऊर्जा एवं अनुसंधान आवश्यकताओं के लिए समर्पित है।
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