खुर्शीद का बड़ा बयान: आतंक का कोई मजहब नहीं, आतंकवादी कभी धार्मिक नहीं होता
नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने आतंकवाद और धर्म के जुड़ाव पर एक बड़ा बयान दिया है जिससे राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। उन्होंने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में खा की किसी भी आतंकवादी को किसी खास मजहब से जोड़कर देखना गलत है।
उनके अनुसार ऐसा करना न सिर्फ खुद के साथ बल्कि उस पुरे धर्म के साथ भी एक बड़ा अन्याय है। क्योंकि आतंकवादी कभी धार्मिक नहीं हो सकता। इसके साथ ही, उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई टलने के मामले में उन्होंने कहा कि निचली अदालतों में बहस जारी है और सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ इस पर सुनवाई करेगी, इसलिए आज नहीं तो कल उन्हें जमानत मिल ही जाएगी।
कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा
यूपी चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी द्वारा अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर कथित तौर पर बचने के सवाल पर कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि वह सिर्फ अपनी पार्टी के लिए बोल सकते हैं जहां सबका साथ लेकर चलने में दलितों, महिलाओं, पिछड़ों और मुसलमानों समेत समाज के हर कमजोर वर्ग को शामिल किया जाता है,
और राहुल गांधी की इस स्पष्ट सोच के मुताबिक जब मुसलमान की बात करनी हो तो उसे खुलकर सामने रखना चाहिए क्योंकि माहौल के हिसाब से कभी किसी वर्ग विशेष के लिए बात कही जाती है।
इस बयान में कहा गया है की यदि कोई व्यक्ति किसी बात से असहमत या नाराज है तो वह सीधे राहुल गांधी से बातचीत कर सकता है।राहुल गांधी हर किसी की समस्या सुनने और चर्चा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। किसी भी शिकायत को सही मंच और सही तरीके से सामने रखा जाना चाहिए।
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वंदे मातरम’ को लेकर चल रही बहस
यदि विशेष रूप से मुस्लिम महिला मतदाता किसी कारणवश अपनी बात सीधे उन तक नहीं पंहुचा प् रही है तो वे मध्यस्थों के जरिए अपना सन्देश भेज सकती है ताकि वह बात राहुल गाँधी तक पहुंचाई जा सके। वे इन सभी मुद्दों पर गंभीरता से धयान देंगे और जरुरत के अनुसार उचित कदम उठाएंगे।
राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर चल रही बहस पर कांग्रेस नेता ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कीइस मामले में किसी विवाद की कोई जगह नहीं है। ऑफिशियल फंक्शन्स में सभी पद गाए जाने चाहिए। पारंपरिक रूप से हम लोग केवल दो पद गाते चले आ रहे हैं, ताकि किसी को ऐसा न लगे कि यह किसी विशेष वर्ग के लिए ही है।
यह गीत पुरे देश और हर भारतीय का है। ऐसे में उनका सवाल है की जब इतने सालो से एक अच्छी व्यवस्था और परंपरा शांतिपूर्ण चली आ रही थी तो उसमे अचानक बदलाव करने भी भला क्या जरुरत थी।
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