‘महिलाएं घर में रहें’ मौलवी के बयान पर सतीशन का पलटवार
नई दिल्ली: केरल के मुख़्यमंत्री वीडी सतीशन ने बुधवार को सुन्नी इस्लामिक विद्वान कांथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार के उस बयान का कड़ा विरोध किया है दरअसल, उन्होंने कहा था कि महिलाओं को घर के अंदर ही रहना चाहिए।
वीडी सतीशन ने कहा कि ऐसी सोच केरल की प्रगतिशील परंपरा के बिल्कुल खिलाफ है और महिलाओं को समाज में बराबर के अधिकार मिलने चाहिए।
विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने कहा है कि महिलाओं को केवल घरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें जीवन के सभी क्षेत्रों में भाग लेकर समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी सोच प्रगतिशील केरल के अनुकूल नहीं है और वे इस बयान से बिल्कुल सहमत नहीं हैं।
क्या है पूरा मामला
वे इस विवाद पर पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे, जो रविवार को कोच्चि में एक इस्लामिक सम्मेलन में कांतपुरम के बयान के बाद शुरू हुआ था। कांतपुरम ने महिलाओं को सार्वजनिक मंचों पर लाने से भारी तबाही की आशंका जताई और पर्दा प्रथा का समर्थन किया।
केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने इस बयान को महिलाओं की आज़ादी के खिलाफ और पिछड़ी सोच करार देते हुए इसका कड़ा विरोध किया है। इस्लाम में इसे रोकने के लिए महिलाओं के लिए पर्दे का नियम है।
विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने कहा कि महिलाओं को घर में रखने की सोच इस्लामिक इतिहास की गलत व्याख्या है। उन्होंने इतिहास को सही तरीके से समझने की सलाह दी।
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उन्होंने पैगंबर मुहम्मद की पहली पत्नी खदीजा का उदाहरण दिया, जो एक सफल बिजनेसवुमन थीं। साथ ही, उन्होंने पैगंबर की दूसरी पत्नी आयशा का भी जिक्र किया, जिन्होंने ‘ऊंट की लड़ाई’ में सेना का नेतृत्व किया था।
सतीशन ने रानी बिलकिस का भी उदाहरण दिया, जो इतिहास में एक कुशल शासक थीं। उन्होंने कहा कि व्यापार, सेना और शासन में महिलाओं की बड़ी भूमिका का इतिहास खुद इस्लाम में मौजूद है।
वीडी सतीशन का ऐतिहासिक उदाहरण
मुख्यमंत्री मुख़्यमंत्री वीडी सतीशन ने ऐतिहासिक घटना का उदाहरण दिया। जिसमें खलीफाओं के शासनकाल में भी एक महिला ने ‘मेहर’ शादी के समय दूल्हे द्वारा दुल्हन को दी जाने वाली रकम से जुड़े एक बड़े फैसले पर सबके सामने सवाल उठाया था।
उन्होंने कहा कि इतिहास में महिलाओं को हमेशा अपनी बात रखने और सही फैसले पर सवाल उठाने की आज़ादी रही है।
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