‘फ्रांस जैसे हालातों से लें सबक’: विजयादशमी पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान
नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में विजयादशमी के पावन अवसर पर पारंपरिक शस्त्र पूजन किया और संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार की समाधि पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
अपने विशेष संबोधन में उन्होंने देशवासियों को एकता का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि जब भी हम आपस में विभाजित (बंटे) हुए हैं, तब हम बेहद कमजोर हुए हैं।
संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में साल भर चले शताब्दी समारोह के कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए उन्होंने इस वर्ष संत रविदास जी की 650वीं जयंती को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
विदेशी आक्रमण के दौर में संत रविदास का उजाला
भागवत ने कहा कि जब हमारा देश विदेशी आक्रमणकारियों के क्रूर हमलों, अत्याचारों और चारों तरफ फैले डर के माहौल से जूझ रहा था, तब संत रविदास जी ने समाज में ‘स्वधर्म निष्ठा’, आपसी भाईचारे सामाजिक समरसता और सच्ची भक्ति का उजाला फैलाया।
उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने पवित्र जीवन के उदाहरण से डरे और सहमे हुए समाज का मनोबल बढ़ाया, उन्हें हिम्मत दी और लोगों के भीतर नैतिक गुणों व अच्छे संस्कारों को जिंदा रखा।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत कहते हैं, ‘यह लचीलापन भी इसी ‘सनातन’ दृष्टिकोण का परिणाम है। जब हमने इस भावना को समझा और अपनाया। जब यह भावना हमारी भाषा, जाति, संप्रदाय या समुदाय के प्रति हमारी स्वाभाविक भावनाओं से भी ऊपर रही, जब भावनात्मक एकता और भारतीय राष्ट्रीयता की यह भावना सर्वोपरि रही। तब हम दुनिया भर में हर लिहाज से आदर्श थे।
जब हम इसे भूल गए, तो हम एक-दूसरे के साथ अपने जुड़ाव और अपनेपन की भावना को भी भूल गए, और हम बंट गए। नतीजतन, हम कमजोर हो गए। जब हम कमजोर हुए, तो मन में डर बैठ गया; हम दुनिया से डरने लगे और चिंता करने लगे कि हम बच पाएंगे या नहीं। एक कमजोर व्यक्ति खुद को दीवारों के भीतर सीमित कर लेता है, और ठीक उसी तरह, हमने भी खुद को सीमित कर लिया। ‘
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने एक बयान में कहा कि जैसे-जैसे भारत का कद और तरक्की बढ़ रही है, दुनिया भर में देश को लेकर जिज्ञासा भी बढ़ रही है, क्योंकि पश्चिम की भौतिकवादी और एकांगी जीवनशैली ने वहां कई गंभीर समस्याएं पैदा कर दी हैं।
उन्होंने कहा कि आज वे देश भौतिक रूप से समृद्ध होने के बावजूद पारिवारिक पतन, मूल्य क्षरण, पर्यावरण संतुलन और विविधता को संभालने जैसे सवालों के जवाब तलाशने में असमर्थ हैं।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की चेतावनी
दुनियाभर में हो रहे प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि पश्चिम से चली आंधी और फ्रांस व अल्बानिया जैसे देशों की घटनाओं से सबक लेने की जरूरत है, तथा भारत में भी ऐसे तत्वों से बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन स्वाभाविक हैं, लेकिन उनका उद्देश्य समाज से समाधान निकालना होना चाहिए, न कि सस्ती लोकप्रियता के लिए लोगों को उकसाना।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में कहा कि भारतवासियों की एकता स्वाभाविक और नि:स्वार्थ है, जो किसी सौदे पर नहीं टिकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मजबूत हिंदू समाज बनाने का मतलब दूसरे धर्मों का विरोध करना नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर चलना है। भागवत ने संकट में सूझबूझ दिखाने वाले पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के साहसी कदम को भारतीय संस्कारों का उत्तम उदाहरण बताया।
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