ईरान की बड़ी स्ट्राइक: कुवैत में चीनी फर्म पर मिसाइल हमला, एक कर्मचारी की मौत
कुवैत में ईरान के मिसाइल हमले की चपेट में एक चीनी कंपनी की इमारत आने से साझेदार चीन को भी बड़ा झटका लगा है, जिससे दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ सकता है
नई दिल्ली(इंटरनेशनल डेस्क): ईरान ने कुवैत में हमला किया है, जिसकी चपेट में उसका अपना ही पार्टनर चीन आ गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के मिसाइल अटैक में उत्तरी कुवैत में एक चाइनीज फर्म की बिल्डिंग तबाह हो गई और इस दौरान एक वर्कर की मौत हो गई।
कुवैत की सेना ने बताया कि गुरुवार सुबह हुए इस हमले ने चीनी कंपनी की इमारत को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।
यह घटना जॉर्डन के एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा ईरान से दागी गई पांच मिसाइलों को मार गिराए जाने के कुछ घंटों बाद सामने आई है।
यह हमला ऐसे समय में हुआ जब अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकाने पर ईरान द्वारा पहले किए गए मिसाइल हमले के जवाब में “ईरान के खिलाफ हमलों का एक बड़ा दौर” पूरा कर लिया है।
सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के दर्जनों ठिकानों पर हमले किए, जिनमें मिलिट्री कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन फैसिलिटी तथा तटीय निगरानी व डिफेंस साइटें शामिल थीं।
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जॉर्डन की सेना ने बताया कि उनके द्वारा मिसाइलों को रोके जाने से किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
ईरान और चीन के रिश्ते अब तक संतुलित रहे हैं और कूटनीतिक रूप से चीन ने अमेरिका-इजराइल के हमलों की निंदा करते हुए ईरान की संप्रभुता का समर्थन किया है तथा युद्धविराम की अपील की है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स का दावा है कि चीन कुछ ही हफ्तों में कंधे से दागी जाने वाली 400 ‘शोल्डर-फायर्ड एयर-डिफेंस मिसाइल लॉन्चर’ की पहली खेप तेहरान भेजने वाला है, लेकिन ऐन वक्त में कुवैत में चीनी फर्म पर ईरान के हमले की खबर आ गई है, जो दोनों देशों के संबंधों में तनाव पैदा कर सकता है।
ईरान और अमेरिका की लड़ाई को लगभग आधा साल पूरा होने को है और इस संघर्ष का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसमें अब सऊदी अरब की भी सीधी एंट्री हो गई है।
सऊदी अरब ने इराकी मिलिशिया पर अपने तेल ठिकानों पर ड्रोन हमले करने का आरोप लगाया है, जबकि यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी एनर्जी साइट पर हमले की बात कही है।
इसी सिलसिले में सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने बुधवार को अमेरिकी नेताओं से मुलाकात कर यह कड़ा संदेश दिया है कि सऊदी अरब अपने तेल उद्योग और बुनियादी ढांचे को ईरान या उसके प्रॉक्सी द्वारा निशाना बनाए जाने को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा।
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