चुनाव आयोग में बड़ा फेरबदल: सीमा खन्ना और मनीष गर्ग की जिम्मेदारियों में बदलाव
नई दिल्ली: चुनाव आयोग के भीतर अंदरूनी कामकाज को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है, जिसके तहत डिप्टी इलेक्शन कमिश्नरों (DEC) और महानिदेशकों (DG) की जिम्मेदारियों में नए सिरे से बदलाव हुआ है।
चुनाव आयोग में नए डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर प्रकाश राजपुरोहित की नियुक्ति के बाद अधिकारियों के बीच विभागों और कामकाज का नया बंटवारा किया गया है। नए आदेश के तहत वरिष्ठ डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर पवन कुमार शर्मा को आईटी, आईसीटी, शिकायत निवारण, राजनीतिक दलों, चुनाव खर्च नीति और कुछ चुनिंदा जोन की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि आईटी महानिदेशक सीमा खन्ना को अपने विभाग की फाइलें उन्हीं के माध्यम से भेजनी होंगी।
डिजिटल सिस्टम पर पाबंदियों के आरोप
सीमा खन्ना का विभाग मतदाता सूची के डिजिटल सिस्टम और सॉफ्टवेयर में पाबंदियों को लेकर पहले से ही विवादों में रहा है, जिसके कारण राज्य स्तर के अधिकारियों और ईआरओ की पहुंच मतदाता सूची तक सीमित होने के आरोप लगे थे।
नए कार्य आवंटन में मनीष गर्ग के पास चुनावी योजना, ईवीएम और डेटाबेस प्रबंधन की जिम्मेदारी बरकरार है और प्रकाश राजपुरोहित चुनावी योजना के मामलों में उनकी सहायता करेंगे, वहीं डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर भानु प्रकाश येतुरु प्रशासन, स्थापना, मतदाता सूची और आरटीआई का कामकाज संभालेंगे।
आयोग के भीतर यह फेरबदल और विवाद 28 जुलाई के उस आदेश से शुरू हुआ था जब संजय कुमार के तबादले के बाद सीमा खन्ना को सीधे रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया था, जिस पर चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर बिना परामर्श के फैसले लेने और फाइलें उपलब्ध न कराने पर आपत्ति जताई थी।
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हालांकि, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर स्पष्ट किया कि जुलाई वाला आदेश कभी लागू ही नहीं हुआ था और 4 नवंबर का यह नया आदेश आयोग का एक सर्वसम्मत फैसला है। इसके अलावा, आयोग में मतभेदों का यह मामला विशेष गहन पुनरीक्षण और सीमा खन्ना के नेतृत्व वाले नए आईटी प्रोटोकॉल से जुड़े विवादों के बीच भी चर्चा में रहा है।
विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और विवादित एसआईआर को रद्द करने की मांग के बीच पिछले दो महीनो से संसद से लेकर सड़क तक भारी विरोध प्रदर्शन हुए है।
इस सियासी टकराव के कारण दिल्ली में मेट्रो सेवाएं रोकने, इंटरनेट बंद करने और धारा 144 लगाने जैसे कड़े कदम उठाने पड़े। हालात को संभालने के लिए करीब 40 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जिससे पूरे देश में राजनीतिक हलचल बेहद तेज हो गई है।
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