अमेरिका में बदले मोहन भागवत के स्वर, मुसलमानो को बताया भारत के लिए ज़रूरी

अमेरिका में बदले मोहन भागवत के स्वर, मुसलमानो को बताया भारत के लिए ज़रूरी

नई दिल्ली(इंटरनेशनल डेस्क)। हिंदुत्व और हिन्दू राष्ट्र पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका में अलग बयान दिया है। आरएसएस के शताब्दी वर्ष के वैश्विक जनसंपर्क कार्यक्रम के तहत अमेरिका पहुँचे मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में आयोजित एक कार्यक्रम में ‘बहुलवाद’ की अवधारणा और भारत की ‘विविधता में एकता’ की परंपरा के बीच की समानता को रेखांकित किया।

सम्मेलन के दौरान जब मोहन भागवत से देश में ‘हिंदू राष्ट्र’ के विचार और मुसलमानों की स्थिति को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंदुत्व कभी भी किसी को बाहर निकालने की बात नहीं सिखाता।

उन्होंने साल 2018 की अपनी दिल्ली की एक व्याख्यान माला का जिक्र करते हुए कहा, “मुस्लिम भाइयों ने मुझसे सवाल पूछा था कि आप एक हिंदू संगठन हैं और हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं, तो हम मुसलमानों का क्या होगा? क्या आप हमें बाहर निकाल देंगे? मैंने तब भी कहा था और आज भी कहता हूँ—नहीं, हिंदुत्व यह नहीं है। यदि कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता।”

मोहन भागवत ने कहा कि भारत की परंपरा हमेशा से यह मानती आई है कि धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक ही है। उन्होंने कहा कि प्रकृति का नियम विविधता है और एकता उसका मूल सत्य है, इसलिए समाज में हर धर्म और समुदाय की विशिष्टता का सम्मान किया जाना चाहिए।

इतना ही नहीं संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इस बात पर भी जोर दिया कि आज की राजनीति अक्सर स्वार्थ का खेल बन चुकी है। वास्तविक और स्थाई बदलाव राजनीति के जरिए नहीं, बल्कि समाज के स्तर पर आपसी संवाद और निस्वार्थ सेवा भाव से ही आ सकता है। उन्होंने कहा कि आरएसएस बिना किसी धार्मिक भेदभाव के समाज के हर जरूरतमंद की सेवा करने में विश्वास रखता है।

क्या संघ की शाखाओं में भी ऐसा संदेश देंगे भागवत?

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने हिंदू राष्ट्र, हिंदुत्व और देश के मुसलमानो को लेकर अमेरिका में जो बयान दिया है, उसे लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने मोहन भागवत के सुर बदले होने का आरोप लगाते हुए सवाल किया है कि क्या मुसलमानो को देश ज़रूरत बताने वाला ऐसा संदेश आरएसएस की शाखाओं में भी दिया जायेगा ?

कई यूजर्स ने सोशल मीडिया पर मोहन भागवत के बयान को लेकर कहा कि देश की एकता अखंडता और विविधता को लेकर ऐसा पाठ सबसे पहले बीजेपी और देश के हिंदू संगठनों को पढ़ाया जाना चाहिए। कई यूजर्स ने सवाल किया कि जब आरएसएस की सोच देश के मुसलमानो को जोड़कर ही देश बनाने की है तो फिर आरएसएस अब तक नफरती बयान क्यों देता रहा है ?


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Raja Zaid

"राजा ज़ैद एक जाने-माने पत्रकार हैं। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ राजनीति और सामायिक विषयो की कवरेज का 15 वर्षो से अधिक का अनुभव है।