मुस्तफाबाद वोटर लिस्ट विवाद: बिना नोटिस वोटर लिस्ट से नाम काटने की कोशिश,बिना नोटिस भरे फॉर्म-7
नई दिल्ली: दिल्ली के मुस्तफाबाद में वोटर लिस्ट जांच (SIR) के दौरान बिना नोटिस दिए लोगों के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 भरने के आरोप लग रहे हैं।
अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, दयालपुर में पिछले 20 सालों से रह रहे दर्जी साजिद हुसैन तब बेहद परेशान हो गए जब उन्हें जानकारी मिली कि उनकी पत्नी और बेटे का नाम मतदाता सूची से काटने के लिए फॉर्म-7 दाखिल किया गया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सालों से एक ही पते पर रहने के बावजूद उन्हें बिना कोई पूर्व सूचना या आधिकारिक नोटिस दिए यह कार्रवाई की जा रही है।
बिना जानकारी के नाम हटाने की कोशिश
हुसैन के मुताबिक, जिस शख्स ने ये फॉर्म भरे हैं उसका नाम उन्होंने कभी नहीं सुना इस इलाके के 28 मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई थी। कारण में बताया गया कि वो अनुपस्थित हैं।
या स्थायी रूप से कहीं और चले गए या मर चुके हैं। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार ये सभी आवेदन भाजपा के बूथ-स्तरीय एजेंट-2 चंद्र शेखर नैनवाल ने दाखिल किए थे
इंग्लिश अखबार द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, ये सभी 28 लोग अपने अपने पते पर ही रह रहे हैं. उन्होंने फॉर्म भी जमा किए थे और 31 अगस्त की ड्राफ्ट सूची में उनके नाम थे।
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अखबार ने इनमें से 19 लोगों या उनके परिवार से बात की। सबके पास सही पहचान पत्र थे। किसी ने भी चंद्र शेखर नैनवाल का नाम पहले नहीं सुना था।
बिना सूचना वोटर लिस्ट से नाम काटने का आरोप
दिल्ली के मुस्तफाबाद निर्वाचन क्षेत्र में बिना किसी पूर्व सूचना के मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कटवाने का गंभीर मामला सामने आया है।
टीवी9 भारतवर्ष की रिपोर्ट के अनुसार, अकेले पोलिंग बूथ नंबर 129 पर ही कई लोगों के नाम मुख्य चुनाव अधिकारी की रोजाना की आपत्ति सूची में डाल दिए गए, लेकिन प्रभावित वोटर्स को इसकी कोई भनक तक नहीं लगी और न ही उन्हें कोई आधिकारिक नोटिस मिला।
पूरे मुस्तफाबाद इलाके में अब तक ऐसी कुल 843 आपत्तियां दर्ज कराई जा चुकी हैं। आरोप है कि इनमें से बाहरी लोगों द्वारा दाखिल किए गए 597 फॉर्मों में से 572 फॉर्म अकेले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) द्वारा भरे गए हैं, जिनमें मुख्य रूप से 24 अलग-अलग क्षेत्रों के मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाया गया है।
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