यूपीआई शुल्क पर केंद्र के साथ आए उमर अब्दुल्ला, तकनीकी खर्च का दिया हवाला
नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर के मुख्य मंत्री उमर अब्दुल्लाह ने यूपीआई UPI भुगतान पर शुल्क लगाने के विचार का समर्थन किया है। उनका मानना है कि डिजिटल भुगतान से जुड़े तकनिकी ढांचे को लगातार चालू रखना और उसकी देख रेख करना काफी खर्चीला काम है।
लेकिन साथ ही केंद्र सरकार को यह ध्यान रखने की भी सलाह दी है कि इस व्यवस्था का कोई भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ सीधे आम जनता या छोटे ग्राहकों पर नहीं डाला जाना चाहिए।
यूपीआई शुल्क पर उमर अब्दुल्ला की सफाई
सीएम ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “ये शुल्क हर किसी पर नहीं लगाया जा रहा है। सबसे पहली बात, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने पर कोई शुल्क नहीं लगता है। इसके अलावा, आम ग्राहकों से तब तक कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा जब तक वे एक तय सीमा से ज्यादा ट्रांजैक्शन न करें
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि UPI इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखना और चलाना सस्ता नहीं है। उन्होंने बताया कि पेमेंट सिस्टम को चलाने में काफी पैसा खर्च होता है। उन्होंने बताया हकीकत यह भी है कि जब कोई चीज पूरी तरह से मुफ्त में मिलती है तो हम अक्सर उसकी सही कीमत नहीं समझते।
फिर भी भारत सरकार को ये पक्का करना चाहिए कि आम नागरिकों पर इन शुल्कों का बोझ न पड़े। अगर कंपनियों से शुल्क लिया जाता है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है क्योंकि वैसे भी कंपनियां UPI के जरिए काफी मुनाफा कमाती हैं।
यूपीआई शुल्क पर सीएम की सफाई
आगामी विधानसभा सत्र के संचालन को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की मुख्य कोशिश सदन की कार्यवाही को बिना किसी बाधा के चलाने और विधायकों के हर सवाल का संतोषजनक जवाब देने की होगी। उन्होंने समझाया कि विधानसभा सत्र में दो मुख्य काम होते हैं।
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पहला सरकार से जुड़े जरूरी कानून बनाना जो केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण पूर्ण राज्य के मुकाबले थोड़े कम होते हैं, लेकिन फिर भी कुछ जरूरी प्रस्ताव सदन में लाए जाते हैं।
दूसरा काम सत्ता और विपक्ष के सभी विधायकों को अपने इलाके के जनहित के मुद्दे उठाने वाले सवाल पूछने और नए बिल पेश करने का पूरा अवसर देना है। लेकिन फिर भी ऐसे विधायी मामले होते हैं जिन्हें सरकार सदन के सामने पेश करती है।
इसके साथ ही माननीय विधायकों को चाहे वे सत्ता पक्ष के हों या विपक्ष के अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों और लोगों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर सवाल उठाने का मौका मिलता है।
बिल और प्रस्ताव पेश किए जाते हैं पहला सरकार से जुड़े जरूरी कानून बनाना जो केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण पूर्ण राज्य के मुकाबले थोड़े कम होते हैं।
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