पंजाब निकाय चुनाव: AAP का जलवा, 8 में से 5 निगमों पर किया कब्ज़ा
पंजाब निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 8 में से 5 नगर निगमों पर कब्जा जमाया है. नतीजों को 2027 विधानसभा चुनाव का बड़ा संकेत माना जा रहा है.
`
नई दिल्ली: पंजाब के नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा संदेश दिया है। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) ने स्थानीय निकाय चुनावों में शानदार प्रदर्शन करते हुए खुद को राज्य की सबसे मजबूत राजनीतिक ताकत के रूप में स्थापित किया है।
8 नगर निगमों में से 5 पर कब्जा और बड़ी संख्या में नगर परिषदों व नगर पंचायतों में जीत ने यह संकेत दिया है कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए मजबूत स्थिति में पहुंच रही है।
हालांकि कांग्रेस और बीजेपी भी कुछ इलाकों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में सफल रही हैं, लेकिन कुल मिलाकर चुनावी तस्वीर AAP के पक्ष में जाती दिखाई दे रही है। यही वजह है कि इन नतीजों को 2027 विधानसभा चुनाव का शुरुआती संकेत माना जा रहा है।
नगर निगम चुनावों में आम आदमी पार्टी ने बठिंडा, मोगा, बरनाला, बटाला और मोहाली में स्पष्ट बहुमत हासिल किया। मोहाली में पार्टी ने 50 में से 26 सीटें जीतकर निगम पर कब्जा किया।
कांग्रेस को यहां 12 सीटें मिलीं, जबकि शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी काफी पीछे रहे। मोगा में AAP ने 50 में से 31 वार्ड जीतकर मजबूत प्रदर्शन किया।
वहीं बरनाला में पार्टी ने 36 सीटों पर जीत हासिल कर विपक्ष को काफी पीछे छोड़ दिया। बठिंडा और बटाला में भी आम आदमी पार्टी ने आराम से बहुमत हासिल किया। इन नतीजों से साफ है कि शहरी क्षेत्रों में भी AAP का जनाधार मजबूत बना हुआ है और सरकार के कामकाज को मतदाताओं का समर्थन मिला है।
जहां AAP सबसे बड़ी विजेता बनकर उभरी, वहीं बीजेपी और कांग्रेस ने भी कुछ क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक जमीन बचाने में सफलता हासिल की। बीजेपी ने अबोहर नगर निगम में 28 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। यह जीत इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि अबोहर बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ का गृह क्षेत्र है।
दूसरी तरफ कांग्रेस ने कपूरथला नगर निगम में शानदार प्रदर्शन करते हुए 50 में से 31 सीटें जीत लीं। इससे कांग्रेस को यह संदेश देने का मौका मिला है कि पार्टी पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है और कुछ इलाकों में अभी भी उसका मजबूत आधार मौजूद है। पठानकोट नगर निगम का परिणाम सबसे दिलचस्प रहा।
यहां बीजेपी 22 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी।
कांग्रेस को 18 और AAP को 10 सीटें मिलीं। इस परिणाम ने यह दिखाया कि सीमावर्ती और कुछ खास क्षेत्रों में बीजेपी की पकड़ बनी हुई है, लेकिन उसे अभी भी व्यापक जनसमर्थन जुटाने की जरूरत है।
नगर निगमों के अलावा नगर परिषदों और नगर पंचायतों में भी आम आदमी पार्टी ने बढ़त बनाई। राज्य की 75 नगर परिषदों में से 45 पर AAP ने जीत दर्ज की। कांग्रेस को सिर्फ 5, बीजेपी को 3 और शिरोमणि अकाली दल को 2 परिषदों में सफलता मिली।
इसे भी पढ़ें: ‘घसीटने वाले पुलिसकर्मी बोले- इस सरकार को हटाइए’: राहुल गांधी का बड़ा दावा
कई जगह निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। इसी तरह 20 नगर पंचायतों में से 10 पर AAP ने कब्जा जमाया।
अकाली दल को 5, कांग्रेस को 1 और 4 नगर पंचायतों में निर्दलीय उम्मीदवारों को बहुमत मिला। इन आंकड़ों से साफ है कि स्थानीय स्तर पर भी आम आदमी पार्टी का संगठन और जनाधार मजबूत हुआ है।
स्थानीय निकाय चुनाव और विधानसभा चुनाव के मुद्दे अलग होते हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ऐसे चुनाव जनता के मूड का शुरुआती संकेत जरूर देते हैं।
2022 में प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई AAP के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने जनाधार को बनाए रखने की थी।
विपक्ष लगातार कानून-व्यवस्था, नशे, बेरोजगारी और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर सरकार को घेरता रहा है।
इसके बावजूद निकाय चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन बताता है कि सरकार के खिलाफ कोई बड़ा janaakrosh फिलहाल नजर नहीं आ रहा। इसके साथ ही विपक्ष की बिखरी हुई स्थिति भी AAP को फायदा पहुंचाती दिख रही है।
कांग्रेस कुछ क्षेत्रों तक सीमित नजर आई, जबकि अकाली दल का प्रभाव पहले की तुलना में काफी कम दिखाई दिया। बीजेपी ने कुछ इलाकों में मजबूती दिखाई, लेकिन पूरे राज्य में प्रभाव छोड़ने में अभी उसे समय लग सकता है।
निकाय चुनावों में मिली जीत के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे 2027 विधानसभा चुनाव का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि जनता ने आम आदमी पार्टी के कामकाज पर मुहर लगाई है और यह परिणाम दिखाते हैं कि 2027 में पार्टी और बड़े बहुमत के साथ सरकार बना सकती है।
मान ने यह भी कहा कि पंजाब के लोगों ने विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनहित की राजनीति को चुना है। उनके मुताबिक मतदाताओं ने धर्म और जाति के आधार पर राजनीति करने वाली ताकतों को नकार दिया है और सेक्युलर सोच का समर्थन किया है।
निकाय चुनावों के नतीजों ने AAP का आत्मविश्वास बढ़ाया है, लेकिन साथ ही विपक्ष के सामने भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। कांग्रेस, बीजेपी और अकाली दल को अब 2027 से पहले अपनी रणनीति पर नए सिरे से काम करना होगा।
फिलहाल तस्वीर यही कहती है कि पंजाब की राजनीति में आम आदमी पार्टी सबसे मजबूत खिलाड़ी बनी हुई है। हालांकि विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन निकाय चुनावों के नतीजों ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि 2027 की लड़ाई में AAP को हराना विपक्ष के लिए आसान नहीं होगा।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
