CBSE छात्र वेदांत से मिले राहुल गांधी, ट्रोल करने वालो को दिया करारा जवाब
राहुल गांधी ने इस विवाद के केंद्र में रहे छात्र वेदांत श्रीवास्तव और उसके साथियों से मुलाकात की है। इस मुलाकात का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और ट्रोलर्स पर बेहद तीखा तंज कसा है
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं परीक्षा के मूल्यांकन और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम में आई गड़बड़ियों को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस विवाद के केंद्र में रहे छात्र वेदांत श्रीवास्तव और उसके साथियों से मुलाकात की है। इस मुलाकात का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और ट्रोलर्स पर बेहद तीखा तंज कसा है।
“17 साल के डीप स्टेट एजेंट्स”
राहुल गांधी ने छात्रों से बातचीत का वीडियो शेयर करते हुए एक्स (X) पर लिखा,”मेरे साथी ‘देशद्रोही सोरोस (Soros) एजेंट्स’ के साथ एक दिलचस्प बातचीत। वेदांत और उसके दोस्त प्रतिभाशाली, बहादुर युवा भारतीय हैं, जिन्होंने सीबीएसई और मोदी सरकार से सीधे और आसान सवाल पूछे — लेकिन जवाब के बदले उन्हें सिर्फ अपमान मिला।”
छात्रों ने बयां किया अपना दर्द
12वीं के छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने बताया कि फिजिक्स के पेपर में उम्मीद से बहुत कम नंबर आने पर जब उन्होंने आरटीआई/री-इवैल्यूएशन के जरिए अपनी आंसर-शीट की कॉपी निकाली, तो वह दंग रह गए। सीबीएसई द्वारा पोर्टल पर अपलोड की गई आंसर-शीट उनकी थी ही नहीं, बल्कि किसी दूसरे छात्र की थी।
वेदांत और उनके भाइयों ने जब इस डिजिटल गड़बड़ी को सोशल मीडिया पर उजागर किया, तो सरकार को घेरने की साजिश बताकर उन्हें बुरी तरह ट्रोल किया गया। छात्रों ने राहुल गांधी को बताया, “हमें सोशल मीडिया पर देशद्रोही, पाकिस्तानी एजेंट और डीप स्टेट एजेंट तक कहा गया।”
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इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी हंस पड़े और कहा, “17 साल के डीप स्टेट एजेंट्स… ये तो पागलपन है! आप सिर्फ अपनी आंसर-शीट मांग रहे थे, इसमें देशद्रोह कहां से आ गया? मोदी सरकार देश के युवाओं और जेन-जी (Gen Z) से डरती है क्योंकि वे अब सवाल पूछने लगे हैं।”
क्या है पूरा CBSE OSM विवाद?
इस साल सीबीएसई ने डिजिटल मूल्यांकन को बढ़ावा देने के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम लागू किया था। रिजल्ट आने के बाद देश भर के हजारों छात्रों और अभिभावकों ने इसमें गंभीर खामियों के आरोप लगाए हैं। छात्रों का दावा है कि स्कैन की गई कॉपियों में कई पन्नों का मूल्यांकन ही नहीं हुआ, और नंबर जोड़ने में भी गलतियां की गईं।
इतना ही नहीं छात्रों का आरोप है कि री-इवैल्यूएशन के लिए अप्लाई करते समय सीबीएसई का पेमेंट पोर्टल बार-बार क्रैश हो रहा था। छात्रों का आरोप है कि नए डिजिटल सिस्टम के कारण इस साल 12वीं का कुल पास प्रतिशत गिरकर 85.20% रह गया, जो पिछले साल (88.39%) के मुकाबले 3.19% कम है।
सीबीएसई ने स्वीकारी गलती
चौतरफा दबाव और वेदांत की पोस्ट वायरल होने के बाद, सीबीएसई ने अपनी इस तकनीकी गलती को स्वीकार किया और छात्र को उसकी सही आंसर-शीट मुहैया कराई। वहीं, शिक्षा मंत्रालय ने इस ऑनलाइन गड़बड़ी को ठीक करने के लिए आईआईटी (IIT) और पीएसयू बैंकों के एक्सपर्ट्स की मदद ली है।
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