राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड: ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा

राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड: ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा

अयोध्या। अयोध्या के भव्य श्रीराम जन्म भूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान राशि में भारी हेराफेरी के मामले में शुक्रवार को अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर देखने को मिला। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में की गई बेहद सख्त सिफारिशों और चौतरफा राजनीतिक दबाव के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय और अनिल मिश्रा पर पिछले कुछ दिनों से लगातार पद छोड़ने का भारी दबाव था। आखिरकार, दोनों शीर्ष पदाधिकारियों ने निष्पक्ष जांच का हवाला देते हुए ‘नैतिकता के आधार पर’ अपना इस्तीफा सौंप दिया।

क्यों खड़ा हुआ इस्तीफे का नौबत?

यह बड़ा घटनाक्रम गुरुवार को अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में दर्ज कराई गई FIR और उसके बाद हुई 8 आरोपियों की गिरफ्तारी के ठीक बाद सामने आया है।

मुख्य आरोपी से कनेक्शन:

पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में मुख्य आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव है, जो लंबे समय तक चंपत राय का बेहद करीबी और उनका निजी ड्राइवर रहा था। उसी के पास मंदिर के दानपात्रों की चाबियां और गणना कक्ष का जिम्मा था।

SIT की सख्त रिपोर्ट:

3 सदस्यीय उच्चस्तरीय एसआईटी (SIT) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जो शुरुआती रिपोर्ट सौंपी, उसमें मंदिर के आंतरिक वित्तीय प्रबंधन, सुरक्षा और वरिष्ठों की निगरानी पर गंभीर सवाल उठाए गए थे।

स्वतंत्र जांच का हवाला:

चंपत राय के करीबी सूत्रों ने बताया कि जब सीधे उनके स्टाफ और व्यवस्था पर इतने गंभीर आरोप लग रहे हों, तो पद पर बने रहना ठीक नहीं था। निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने के लिए ही उन्होंने पद से हटने का फैसला किया।

“ये दोनों जेल भी जाएंगे…” शिकायतकर्ता बीजेपी नेता का बड़ा दावा

चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद इस पूरे मामले की प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को पत्र लिखकर शिकायत करने वाले भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह का एक बड़ा और विस्फोटक बयान सामने आया है।

डॉ. रजनीश सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा तो सिर्फ शुरुआत है, ये दोनों जेल भी जाएंगे। एसआईटी के समक्ष इनके खिलाफ बेहद मजबूत साक्ष्य आए हैं, तभी इन्हें पद छोड़ना पड़ा। अनिल मिश्रा के खिलाफ किसी सबूत की जरूरत नहीं है, उनका आलीशान घर देख लीजिए। उनका बेटा विदेश में पढ़ रहा है। इन दोनों की संपत्तियों की प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आय से अधिक संपत्ति (DA) के मामले में गहन जांच होनी चाहिए।”

विपक्ष के निशाने पर थे चंपत राय

जब से इस महाघोटाले की बात सामने आई थी, तब से समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल और शिवसेना (UBT) के संजय राउत लगातार सीधे चंपत राय को निशाना बना रहे थे।

विपक्ष का आरोप था कि पुलिस केवल बैंक के छोटे कर्मचारियों और निचले स्तर के कर्मियों को गिरफ्तार कर ‘आईवाश’ (दिखावा) कर रही है, जबकि इस घोटाले के तार बहुत ऊपर तक जुड़े हैं। चंपत राय के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों ने इसे अपनी नैतिक जीत बताया है और मामले की कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग तेज कर दी है।

क्या होगा अगला कदम?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही साफ कर चुके हैं कि राम भक्तों की आस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जांच एजेंसियां आने वाले दिनों में इन दोनों पूर्व पदाधिकारियों को भी पूछताछ के लिए तलब करेंगी? वहीं, ट्रस्ट के नए महासचिव की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी, इस पर भी मंथन शुरू हो गया है।


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Raja Zaid

"राजा ज़ैद एक जाने-माने पत्रकार हैं। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ राजनीति और सामायिक विषयो की कवरेज का 15 वर्षो से अधिक का अनुभव है।