सुप्रीम कोर्ट से राहत: भ्रष्टाचार मामले में पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी को अग्रिम जमानत

सुप्रीम कोर्ट से राहत: भ्रष्टाचार मामले में पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी को अग्रिम जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने डीएमके के नेता सेंथिल बालाजी को राहत देते हुए भ्रष्टाचार के नए मामले में अग्रिम जमानत दे दी है। हालांकि यह जमानत कई शर्तों के साथ दी गई है और सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर शर्तों का उल्लंघन हुआ तो जमानत रद्द कर दी जाएगी

 

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने डीएमके नेता और तमिलनाडु के पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी को भ्रष्टाचार के एक मामले में बड़ी राहत देते हुए अगली सुनवाई तक अग्रिम जमानत प्रदान कर दी है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कुछ शर्तों के साथ यह राहत दी है, जिसके तहत अदालत ने बालाजी को जांच में पूरा सहयोग करने, अपना पासपोर्ट जमा कराने और किसी भी गवाह को प्रभावित न करने का निर्देश दिया है।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गुरु कृष्णकुमार से कहा कि यदि जमानत की शर्तों का मामूली भी उल्लंघन होता है, तो वे तुरंत अदालत आ सकते हैं और अदालत अपने आदेश में संशोधन या उसे रद्द कर देगी। इससे पहले, शुक्रवार को न्यायमूर्ति वी. मोहना ने बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन (टैस्मैक) में कथित अनियमितताओं से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में अग्रिम जमानत की मांग वाली बालाजी की याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए सहमति जताई थी।

मद्रास हाई कोर्ट द्वारा टैस्मैक घोटाले में बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी और अमित आनंद तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट से मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की थी और तर्क दिया था कि बालाजी के खिलाफ किसी भी समय कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

तमिलनाडु विधानसभा में कोयंबटूर दक्षिण सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले सेंथिल बालाजी पर आरोप है कि टैस्मैक में दुकानों और बार के आवंटन के दौरान बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ। एफआईआर के अनुसार, शराब आपूर्ति करने वाली कंपनियों ने डिस्टिलरियों के लिए फर्जी या बढ़े-चढ़े बिल तैयार किए और करोड़ों रुपये के कथित कमीशन का संगठित नेटवर्क संचालित किया।

बालाजी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित आनंद तिवारी ने दलील दी कि यह मामला वर्ष 2021 से 2025 के बीच की कथित घटनाओं से जुड़ा है।

उन्होंने अदालत को बताया कि बालाजी के फरार होने की कोई आशंका नहीं है और न ही उनसे हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता है।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि टैस्मैक एक स्वतंत्र निगम है और उसका संचालन एक अलग व्यवस्था के तहत होता है, भले ही बालाजी संबंधित विभाग के मंत्री रहे हों।


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Muskan Asif

मुस्कान आसिफ़ (ZH7TV) एक अनुभवी और रचनात्मक कंटेंट, डायनेमिक डिजिटल एडिटोरियल प्रोफेशनल पत्रकार हैं। जो बड़ी और असरदार खबरों का सटीक विश्लेषण करने में माहिर हैं। वे अपने नेटवर्क की पहुँच बढ़ाने के लिए बेहद आकर्षक वीडियो, टेक्स्ट और इंटरैक्टिव डिजिटल कंटेंट तैयार करती हैं।