14 साल बाद भी वही हालात: दिल्ली दरिंदगी पर सर्वोच्च अदालत नाराज
नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में बढ़ती दरिंदगी पर सुप्रीम कोर्ट ने खुद कड़ा एक्शन लेते हुए गहरी चिंता जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने चलती बस में नाबालिग से यौन शोषण और सार्वजानिक पार्क में हुई रेप जैसी हालिया वारदातों को बेहद खौफनाक बताया।
अदालत ने दुख जताते हुए कहा कि इन दर्दनाक घटनाओ ने देश को हिला देने वाले साल 2012 के निर्भया कांड की कड़वी और डरावनी यादो को एक बार फिर सबके सामने लाकर खड़ा कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के ग्रेटर नोएडा से कश्मीरी गेट के बीच चलने वाली एक स्लीपर बस में 16 वर्षीय छात्रा के साथ चालक और कंडक्टर द्वारा किए गए सामूहिक दुष्कर्म की घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे कानून लागू करने वाली एजेंसियों की बड़ी विफलता करार दिया है और इस मुद्दे पर जनहित याचिका दर्ज कर सुनवाई के निर्देश दिए हैं।
सुरक्षा के इंतजामों पर उठाए सवाल
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि सार्वजनिक स्थानों, पार्कों और बसों में रोशनी तथा निगरानी की कमजोर व्यवस्था के कारण इन्हें जोखिम वाले क्षेत्र बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
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कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि इस घटना की 2012 के निर्भया मामले से दर्दनाक समानताएं हैं, जो यह सवाल खड़ा करती हैं कि पिछले एक दशक में सुरक्षा व्यवस्था में कोई सार्थक सुधार हुआ है या नहीं।
केवल एकजुटता जताने को नाकाफी बताते हुए सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय करना और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, जबकि इस सनसनीखेज मामले में पुलिस दोनों आरोपी चालक और कंडक्टर को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।
पीड़ित छात्रा उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की रहने वाली है और 11वि क्लास में पढ़ती है। 3 अगस्त 2026 को पढाई को लेकर माँ की डांट से नाराज होकर वह बिना बताए घर से नॉएडा जाने के लिए निकली थी। अगले ही दिन 4 अगस्त को चलती बस में वह इस खौफनाक वारदात का शिकार हो गई।
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