सोनिया गांधी वोटर लिस्ट विवाद: राउज एवेन्यू कोर्ट ने जवाब के लिए मांगा एक हफ्ते का समय

सोनिया गांधी वोटर लिस्ट विवाद: राउज एवेन्यू कोर्ट ने जवाब के लिए मांगा एक हफ्ते का समय

18 अप्रैल 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद लिखित जवाब  दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 मई 2026 की तारीख तय की है।

क्या है पूरा मामला।

यह विवाद करीब 46 साल पुराना है, जिसे वकील विकास त्रिपाठी ने कोर्ट में उठाया है। मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:

नागरिकता और वोटर लिस्ट: याचिकाकर्ता का दावा है कि सोनिया गांधी को भारत की नागरिकता 30 अप्रैल 1983 को मिली थी, लेकिन उनका नाम 1980 की मतदाता सूची (नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र) में पहले से ही दर्ज था।

धोखाधड़ी का आरोप: याचिका में सवाल उठाया गया है कि बिना भारतीय नागरिक हुए 1980 में उनका नाम वोटर लिस्ट में कैसे आया? आरोप है कि यह “जालसाजी” (Forgery) या “गलत घोषणा” के जरिए किया गया होगा।

1982 में नाम हटाना: याचिका में यह भी कहा गया है कि जब 1982 में अनियमितता की बात सामने आई, तो निर्वाचन आयोग ने उनका नाम डिलीट कर दिया था, जिसे 1983 में नागरिकता मिलने के बाद फिर से जोड़ा गया।

अदालत में अब तक क्या हुआ।

मैजिस्ट्रेट कोर्ट का फैसला: इससे पहले एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट (ACJM) ने इस शिकायत को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने तब कहा था कि यह शिकायत केवल “फोटोकॉपी” और अनुमानों पर आधारित है और कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है।

रिवीजन पिटीशन: विकास त्रिपाठी ने मैजिस्ट्रेट कोर्ट के इसी फैसले को राउज एवेन्यू कोर्ट में चुनौती दी है (Criminal Revision Petition)। वे मांग कर रहे हैं कि इस मामले में FIR दर्ज कर जांच की जाए।

सोनिया गांधी का पक्ष: सोनिया गांधी के वकील आर. एस. चीमा ने इन आरोपों को “राजनीति से प्रेरित” और आधारहीन बताया है। उन्होंने दलील दी कि यह मामला दशकों पुराना है और याचिकाकर्ता के पास कोई पुख्ता दस्तावेज नहीं हैं।

मुख्य बिंदु जो कोर्ट ने पूछे:

पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सोनिया गांधी के वकीलों से एक मौलिक प्रश्न पूछा था:

आप इस मुद्दे को कैसे स्पष्ट करेंगे कि सोनिया गांधी 1983 में नागरिक बनने से पहले ही 1980 में मतदाता कैसे बन गईं।

अब कोर्ट ने दोनों पक्षों को अपने अंतिम लिखित तर्क पेश करने को कहा है, जिसके बाद 16 मई को कोर्ट तय करेगा कि क्या इस मामले में आगे की जांच (FIR) के आदेश दिए जाने चाहिए या नहीं।


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Raja Zaid

"राजा ज़ैद एक जाने-माने पत्रकार हैं। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ राजनीति और सामायिक विषयो की कवरेज का 15 वर्षो से अधिक का अनुभव है।