सीबीएसई की नौवीं में तीन भाषाएं अनिवार्य करने पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई
नई दिल्ली: कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाएं अनिवार्य करने वाले सीबीएसई CBSE के नए नियम के खिलाफ दायर याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगी। इस नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों को तीन भाषाएं पढ़ना जरूरी किया गया है।
जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होना जरूरी है। इसी नियम के विरोध में अदालत में याचिकाएं लगाई गई हैं, जिस पर आज शीर्ष अदालत अपना रुख साफ करेगी।
बढ़ेगा पढ़ाई बोझ, राज्य नीतियां प्रभावित
याचिका लगाने वालों की दलील है कि इस नए नियम से बच्चों और स्कूलों पर पढ़ाई का बोझ बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा, और यह फैसला कुछ राज्यों के अपने भाषा नियमों के खिलाफ भी है।
दूसरी ओर, सीबीएसई (CBSE) का मानना है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत उठाया गया यह कदम देश की भाषाओं को बढ़ावा देने और बच्चों को एक से ज्यादा भाषाएं सिखाने के लिए बहुत जरूरी है।
CBSE ने साल 2026-27 के नए सेशन से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य की है। जिसमें दो भारतीय भाषाएं शामिल करना जरूरी है।
बोर्ड के इसी नए नियम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं लगाई गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने नीति लागू करने के तरीके और CBSE के अधिकार को लेकर सवाल उठाए हैं।
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इस पूरे विवाद पर अदालत ने केंद्र सरकार, सीबीएसई और NCERT से उनका पक्ष पूछा है। और छात्रों पर अतिरिक्त पढ़ाई के दबाव को लेकर भी चर्चा हुई है। अब देश की सबसे बड़ी अदालत इस मामले पर अपना अंतिम फैसला सुनाएगी।
सीबीएसई CBSE के नए तीन भाषा नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस नीति को जमीन पर उतारने से पहले स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों और जरूरी संसाधनों की व्यवस्था की जानी चाहिए।
अगले सत्र से लागू हो नियम
साथ ही, बच्चों पर पढ़ाई का बोझ कम करने के लिए इसे अगले शैक्षणिक सत्र से लागू करने का सुझाव दिया गया है। याचिकाकर्ता के वकील ने बोर्ड की शक्तियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस स्तर का सिलेबस बनाने की जिम्मेदारी सिर्फ एनसीईआरटी (NCERT) की है, सीबीएसई की नहीं।
गौरतलब है कि सीबीएसई के आदेश के अनुसार, नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों को तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है, जिसमें दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी हैं और विदेशी भाषा को केवल एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में ही रखा जा सकता है।
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, सीबीएसई और एनसीईआरटी को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया है।
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