अब पश्चिम बंगाल का बदलेगा नाम, विधानसभा में बिल लाएगी शुभेंदु सरकार
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर केवल बंगाल करने की तृणमूल कांग्रेस TMC सरकार की पुरानी कोशिश अब खत्म होने जा रही है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने सोमवार को घोषणा की कि राज्य का नाम अब सभी भाषाओं में सिर्फ पश्चिम बंगाल’ ही रहेगा ।
इसके लिए राज्य विधानसभा के अगले सत्र में एक नया बिल विधेयक लाया जाएगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि अब अंग्रेजी भाषा में भी ‘वेस्ट बंगाल’ West Bengal लिखने के बजाय आधिकारिक तौर पर पश्चिम बंगाल’ नाम ही इस्तेमाल किया जाएगा।
विभाजन के बलिदानों का सम्मान
शमिक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की है कि राज्य का नाम सिर्फ पश्चिम बंगाल ही रखा जाएगा और इसके लिए आगामी विधानसभा सत्र में एक विधेयक लाया जाएगा।
उनका तर्क है कि यह नाम राज्य के गठन और विभाजन के समय हुए लोगों के बलिदान के ऐतिहासिक इतिहास से जुड़ा है इसलिए केवल ‘बंगाल’ नाम रखने से उस इतिहास की अनदेखी होगी।
राज्य के नाम बदलने की यह चर्चा नई नहीं है इससे पहले 2016 और 2018 में ममता बनर्जी सरकार ने विधानसभा में प्रस्ताव पास कर राज्य का नाम बदलकर बंगाल करने का केंद्र को भेजा था।
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जिसे केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी भाषाओं में एक ही नाम न होने के कारण मंजूरी नहीं दी थी। अब इसी बात को ध्यान में रखते हुए सभी भाषाओं में केवल ‘पश्चिम बंगाल’ नाम तय करने की तैयारी की जा रही है।
कैसे बदलता है राज्य का नाम
संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत किसी भी राज्य का नाम बदलने की एक तय संवैधानिक प्रक्रिया होती है। इसके लिए सबसे पहले संबंधित राज्य की विधानसभा से नाम बदलने का प्रस्ताव विद्येयक पास कराया जाता है।
इसके बाद इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार गृह मंत्रालय के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाता है। केंद्र से हरी झंडी मिलने के बाद राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश पर संसद के दोनों सदनों में विधेयक लाया जाता है और साधारण बहुमत से पास होने व राष्ट्रपति की आखिरी स्वीकृति मिलने के बाद ही नाम परिवर्तन का काम पूरा होता है।
हाल ही में पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलने के बाद अब वहाँ की भाजपा सरकार राज्य का नाम सभी भाषाओं में आधिकारिक रूप से ‘पश्चिम बंग’ Paschim Banga बनाए रखने के लिए विधानसभा के अगले सत्र में नया बिल लाने की तैयारी कर रही है।
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