सत्य निकेतन हादसे की पूरी सुनवाई हाई कोर्ट में ही होगी, सुप्रीमकोर्ट ने दिया आदेश
नई दिल्ली: सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिराने से हुई सात लोगो की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को दिल्ली हाई कोर्ट से अपने पास ट्रांसफर करने की मांग को ख़ारिज कर दिया। अदालत ने साफ़ कहा की चूँकि हाई कोर्ट इस मामले में पहले ही जरुरी कदम उठा चूका है और क़ानूनी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है इसलिए वे इस बनी बनाई स्थिति में कोई बदलाव नहीं करना चाहते।
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने निर्देश दिया है कि दिल्ली हाईकोर्ट भवन निर्माण नियमों के उल्लंघन, अवैध निर्माण और आवासीय क्षेत्रों के व्यावसायिक इस्तेमाल से जुड़े मामलों की नियमित अंतराल पर निगरानी जारी रखेगा तथा सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अपने पास स्थानांतरित करने के विचार को यह कहते हुए टाल दिया कि प्रगति सही दिशा में हो रही है, जबकि इसके साथ ही अदालत ने दिल्ली सरकार और एमसीडी को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के माध्यम से सभी संबंधित रिपोर्ट और हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया है।
एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत सिन्हा ने अदालत को अवगत कराया कि मार्च और अगस्त 2026 के आदेशों के तहत पीजी, छात्रावासों, जिम और कोचिंग सेंटरों के खिलाफ कार्रवाई तथा अवैध निर्माण को गिराने का कार्य शुरू हो चुका है, जिस पर सॉलिसिटर जनरल ने भी सहमति जताते हुए कहा कि एमसीडी ने कई प्रभावी कदम उठाए हैं और स्थानीय मामला होने के कारण इसकी निगरानी हाईकोर्ट द्वारा ही की जानी चाहिए, तथा इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को तय की गई है।
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अदालत की मदद कर रहे एमिकस क्यूरी ने मांग की है की जिम्मेदार अधिकारी समय समय पर लिखित रिपोर्ट देकर बताएं कि उन्होंने जमीनी स्तर पर अब तक क्या कार्यवाई की है। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने भरोसा दिलाया की अगली सुनवाई पर वे दिल्ली हाई कोर्ट के सामने यह पूरी रिपोर्ट पेश कर देंगे। एमिकस क्यूरी भी साफ़ किया की हाई-कोर्ट का अभी का आदेश सिर्फ अवैध पीजी तक ही सीमित है जबकि पिछले आदेशों में चार मंजिल से ऊपर बनी तमाम गैर-क़ानूनी इमरतों पर भी सख्त एक्शन लेने की बात कही गई थी जिस पर प्रशासन की कार्यवाई जारी है।
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