इन 6 बड़े मुद्दों से हुई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हार
नई दिल्ली: साल 2026 के मध्यावधि चुनाव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बहुत बड़ा सियासी झटका साबित हुए है। इन चुनावो में जनता ने ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को नकारते हुए विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को भारी बहुमत दिया है।
अब अमेरिकी संसद के दोनों सदनों-सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स -पर डेमोक्रेटस का पूरी तरह कब्ज़ा हो गया है। इस बड़े उलटफेर ने न केवल अमेरिका की पूरी राजनीति को बदल दिया है, बल्कि राष्ट्रपति ट्रंप के बचे हुए कार्यकाल के लिए भी नए कानून पास कराना और नीतियां लागू करना बेहद मुश्किल कर दिया है।
रॉयटर्स और एसोसिएटेड प्रेस की चुनावी रिपोर्टों के अनुसार, 2026 के मिडटर्म चुनावों में महंगाई, ईरान युद्ध, बढ़ती कीमतें, कड़े इमिग्रेशन नियम और जेफ्री एपस्टीन फाइल्स जैसे मुद्दों पर जनता की नाराजगी के कारण डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आक्रामक प्रचार करने के बावजूद रिपब्लिकन पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी।
ईरान युद्ध और गैसोलीन की आसमान छूती कीमतें
विदेश नीति के मोर्चे पर लंबे खिंचते ईरान युद्ध और उसके कारण अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति में आई अनिश्चितता से अक्टूबर के अंत तक अमेरिका में गैसोलीन की औसत कीमत 4.27 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई, जिससे आम नागरिकों के बजट पर भारी असर पड़ा और अगस्त 2026 के सर्वेक्षणों में 68 प्रतिशत लोगों ने युद्ध को संभालने के ट्रंप के तरीके पर असहमति जताई।
इसके साथ ही किराना, बिजली, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत के चलते लगभग 90 प्रतिशत मतदाताओं ने जीवनयापन के खर्च को प्रमुख मुद्दा माना और दो-तिहाई लोगों ने ऊंची कीमतों के लिए सीधे ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया। वहीं दूसरी ओर, बड़े पैमाने पर निर्वासन की सख्त नीति को लेकर 52 प्रतिशत लोगों ने विरोध जताया, जिससे स्वतंत्र और मध्यमार्गी मतदाता रिपब्लिकनों से छिटक गए।
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इस स्थिति का फायदा उठाते हुए डेमोक्रेट्स ने चुनाव प्रचार में करीब 53 मिलियन डॉलर खर्च कर एपस्टीन फाइल्स, भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग जैसे मुद्दों पर रिपब्लिकन उम्मीदवारों को घेरा और अपने समर्थकों व ट्रंप-विरोधी मतदाताओं को भारी संख्या में मतदान के लिए एकजुट कर चुनाव में बढ़त हासिल की।
चुनावी सर्वे के अनुसार, इस बार डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थकों में वोट डालने को लेकर रिपब्लिकन समर्थकों के मुकाबले 14 प्रतिशत ज्यादा गंभीरता देखी गई। इसके साथ ही, डेमोक्रेट्स के वोटर्स में मतदान करने का उत्साह भी 17 प्रतिशत अधिक था।
सीबीएस न्यूज़ के एग्जिट पोल से साफ़ हुए कि रिपब्लिकन वोटर्स के लिए अब ट्रंप का साथ उतना मायने नहीं रख रहा था, जबकि दूसरी तरफ डेमोक्रेटिक समर्थकों में ट्रंप की नीतियों के खिलाफ वोट देने का एक बहुत बड़ा और मजबूत जज्बा काम कर रहा था।
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