ममता बनर्जी को मिला तृणमूल भवन खाली करने का नोटिस
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खेमे से इस वक्त की एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है।
हाल ही में संपन्न हुए 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में आए राजनीतिक और प्रशासनिक फेरबदल के बीच, तृणमूल कांग्रेस को कोलकाता स्थित उसके मुख्य प्रांतीय कार्यालय यानी ‘तृणमूल भवन’ को खाली करने का एक आधिकारिक नोटिस मिला है।
हालिया विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद आए इस बड़े प्रशासनिक कदम ने राज्य के सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस नोटिस को पूरी तरह से ‘राजनीतिक द्वेष’ से प्रेरित बताया है और इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का एलान किया है।
क्या है पूरा मामला और क्यों मिला नोटिस?
जानकारी के मुताबिक, कोलकाता के बाईपास (ईएम बाईपास) के पास स्थित तृणमूल भवन के एक बड़े हिस्से और उससे सटी सरकारी भूमि के उपयोग को लेकर लोक निर्माण विभाग (PWD) और स्थानीय विकास प्राधिकरण द्वारा एक संयुक्त समीक्षा की गई थी।
प्रशासनिक सूत्रों का दावा है कि भवन के वर्तमान परिसर के एक हिस्से का निर्माण कार्य और लीज की शर्तें नियमों के अनुकूल नहीं पाई गईं, जिसके चलते विभाग ने संपत्ति के पुनर्मूल्यांकन और आंशिक हिस्से को खाली करने का अल्टीमेटम जारी किया है।
यह विवाद ऐसे समय में गहराया है जब हाल ही में कोलकाता नगर निगम (KMC) द्वारा टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के दक्षिण कोलकाता (हरिश मुखर्जी रोड) स्थित आवास पर अनधिकृत निर्माण को लेकर डिमोलिशन नोटिस भी जारी किया गया था।
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एक के बाद एक पार्टी के प्रमुख ठिकानों और नेताओं को मिल रहे इन नोटिसों ने टीएमसी संगठन को बैकफुट पर धकेल दिया है।
ममता बनर्जी का रुख:
चुनाव नतीजों के बाद पार्टी को नए सिरे से खड़ा करने में जुटीं टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इस नोटिस पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है।
पार्टी की आंतरिक बैठक में उन्होंने अपने उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा, “यह हमारे संगठन को मानसिक और प्रशासनिक रूप से तोड़ने की एक सोची-समझी साजिश है। हम किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। हमारे जो नेता या कार्यकर्ता डर रहे हैं, वे जाने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन जो जमीन पर टिके हैं, वे इस तानाशाही का डटकर मुकाबला करेंगे।”
पार्टी के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने भी दिल्ली में बयान जारी कर कहा कि तृणमूल कांग्रेस इस नोटिस के कानूनी पहलुओं का अध्ययन कर रही है और बहुत जल्द इसे कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई विपक्षी आवाजों को दबाने के लिए सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया जा रहा है।
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