यूपी चुनाव: आधी से कम सीटों पर नहीं मानेंगे, कांग्रेस सचिव ने कार्यकर्ताओं को बताया प्लान
यूपी विधानसभा चुनाव में सम्मानजनक हिस्सेदारी के लिए कांग्रेस ने सपा से आधी से ज्यादा सीटें मांगने की रणनीति बनाई है, जिसे राष्ट्रीय सचिव ने कार्यकर्ताओं के साथ साझा किया
लखनऊ: उत्तर प्रदेश आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है, और कांग्रेस व समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच सीट बंटवारे को लेकर दबाव की राजनीति साफ तौर पर दिखने लगी है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सत्यनारायण पटेल ने शनिवार को कांग्रेस कार्यालय कमला नेहरू भवन में कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी पूरी मजबूती से मैदान में उतरेगी।
उन्होंने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि यदि किसी परिस्थिति में समझौता करना भी पड़ा, तो कांग्रेस पार्टी आधे से कम सीटों पर किसी भी सूरत में समझौता नहीं करेगी।
बैठक के दौरान सत्यनारायण पटेल ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस भगवान राम में गहरी आस्था रखती है, जबकि भाजपा राम के नाम पर व्यापार कर सत्ता में बने रहने की कोशिश कर रही है।
पटेल ने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया और जोर देकर कहा कि जमीनी मजबूती के बल पर ही 2027 के विधानसभा चुनाव में विजय प्राप्त की जा सकती है।
उन्होंने यह भी बताया कि शीर्ष नेतृत्व संगठन सृजन अभियान को लेकर बेहद गंभीर है और अगली बैठक जनपद के किसी ब्लॉक में आयोजित की जाएगी।
इसे भी पढ़ें: पीएम मोदी के मेलोडी गिफ्ट पर बवाल, प्रियंका चतुर्वेदी ने बोला हमला, ‘मेलोडी खाओ और खुश हो जाओ’
इस दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष चेतनारायण सिंह ने भी संगठन की मजबूती को कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत बताया।
चुनाव में अब करीब छह-सात महीने का समय बचा है और दोनों ही प्रमुख विपक्षी दल सार्वजनिक बयानों के जरिए अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने और गठबंधन की बातचीत में खुद को बेहतर स्थिति में लाने का प्रयास कर रहे हैं।
जहां एक तरफ कांग्रेस गठबंधन में सम्मानजनक और बराबरी की हिस्सेदारी मांगते हुए 150 से अधिक सीटों पर अपना दावा जता रही है, वहीं दूसरी तरफ सपा नेतृत्व फिलहाल सीटों की संख्या बताने से बच रहा है।
सपा का स्पष्ट कहना है कि सीटों के बंटवारे का एकमात्र आधार जीतने की क्षमता (विनेबिलिटी) होनी चाहिए।
इस बीच, कांग्रेस यह संदेश देने की पुरजोर कोशिश कर रही है कि उसके साथ आने पर ही विपक्षी वोटों का पूरा लाभ मिल सकता है।
अपनी इसी रणनीति के हिस्से के रूप में कांग्रेस समय-समय पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ भी संभावित गठबंधन के संकेत देती रही है, हालांकि बसपा की ओर से ऐसे संकेतों को कभी कोई तवज्जो नहीं दी गई है।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
