दिल्ली CJP प्रदर्शन और लाठीचार्ज पर संसद में हंगामा, खरगे ने लगाया माइक बंद करने का आरोप
संसद के मानसून सत्र के दूसरे दिन भी पेपर लीक और छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर भारी हंगामा हुआ, जहां मल्लिकार्जुन खरगे ने सदन में माइक बंद करने का आरोप लगाते हुए विपक्ष के साथ सरकार को घेरा
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दूसरे दिन छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर दोनों सदनों में जोरदार हंगामा हुआ, जिसके चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
विपक्षी सांसद पेपर लीक पर तत्काल चर्चा कराने की मांग कर रहे थे। राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जा रहा है और एक शब्द बोलते ही उनका माइक बंद कर दिया जाता है।
खरगे ने सवाल उठाया कि क्या यही लोकतंत्र है? उन्होंने कहा कि देश के हजारों छात्र पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सरकार ने उन पर लाठीचार्ज करवाया, आंसू गैस के गोले छोड़े और उन्हें मारा-पीटा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अराजकता फैलाकर युवाओं को डरा रही है और देश को अराजकता की तरफ धकेल रही है, जिसकी वे कड़े शब्दों में निंदा करते हैं।
इस मुद्दे पर लोकसभा सांसद राहुल गांधी ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि देश की पूरी परीक्षा प्रणाली तबाह हो चुकी है तथा शिक्षा व्यवस्था पर आरएसएस का कब्जा है।
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राहुल ने सवाल किया कि छात्रों के भविष्य के इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुप क्यों हैं और सरकार ने अब तक माफी क्यों नहीं मांगी है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तुरंत इस्तीफे की मांग की।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी इस मुद्दे को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि बच्चे और उनके माता-पिता कर्ज लेकर पढ़ाई करते हैं, लेकिन बार-बार पेपर लीक होने से युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि युवाओं की बात सुनी जाए और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लिया जाए।
वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि आजादी के बाद किसी भी सरकार ने युवाओं के साथ ऐसा असंवेदनशील व्यवहार नहीं किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अपने सहयोगियों से राज खुलने के डर से इस्तीफे नहीं मांग पा रही है।
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी घटनाक्रम को प्रशासनिक नाकामी बताते हुए कहा कि सरकार को छात्रों से पहले ही बातचीत करनी चाहिए थी। पूरे मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार के रवैये के खिलाफ एकजुट होकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
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