अमेरिका के धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने भागवत के अमेरिकी दौरे पर जताया कड़ा एतराज, बैन लगाने की मांग
नई दिल्ली: अमेरिका संस्था यूएससीआईआरएफ के अधिकारियो ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगाने और उसके नेताओ को राजनयिक सम्मान न देने की मांग की है। संस्था ने अमेरिकी सरकार से अपील की है कि आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत के प्रस्तावित अमेरिकी दौरे से पहले उनके साथ कोई भी हाई-लेवल मीटिंग न की जाए। दूसरी तरफ भारत सरकार ने यूएससीआईआरएफ के इन आरोपों को हमेशा की तरह पूरी तरह पक्षपातपूर्ण और दुर्भावना से प्रेरित बताकर पहले ही ख़ारिज कर दिया है।
यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) के चेयरमैन आसिफ महमूद ने हाल ही में बयान दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सदस्य हैं। उन्होंने आरएसएस को एक ऐसा मुख्य संगठन बताया है, जिसके सहयोगी समूहों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले करने के आरोप लगते रहे हैं।
यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा
यह बयान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के संभावित अमेरिकी दौरे से पहले सामने आया है, जहां उनके एक कार्यक्रम में शामिल होने का कार्यक्रम है। वहीं, यूएससीआईआरएफ कमिश्नर जीन मिल्स ने सुझाव दिया है कि अमेरिकी सरकार को उन आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करना चाहिए, जो धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार हैं। इस बीच, ‘हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स’ जैसे संगठनों ने भी इस यात्रा और इससे जुड़े घटनाक्रमों को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं साझा की हैं।
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भारत ने यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है। कि यह संस्था देश की “गलत और चुनिंदा” तस्वीर दिखाती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा की यह रिपोर्ट झूठे स्रोतों और खास एजेंडे पर टिकी है। उन्होंने सलाह दी की अमेरिका को भारत की झूटी आलोचना करने के बजाय अपने देश में हिन्दू मंदिरो पर हो रहे हमलो और भारतीयों मूल के लोगो के खिलाफ बढ़ती नफरत पर ध्यान देना चाहिए।
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