विजयन रिश्वत मामला: सुप्रीम कोर्ट की रोक पर माकपा और कांग्रेस में जुबानी जंग शुरू
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और उनके परिवार के खिलाफ कथित रिश्वत मामले की जांच पर एक हफ्ते की अंतरिम रोक लगा दी है। इस फैसले पर माकपा (CPI-M) के नेता एम.वी. गोविंदन ने खुशी जताते हुए कहा कि इससे न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हुआ है।
वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि शीर्ष अदालत ने एफआईआर को पूरी तरह खारिज नहीं किया है, बल्कि सिर्फ एक हफ्ते की मोहलत दी है, जिससे यह साबित होता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू की गई जांच बिल्कुल सही थी।
विजयन मामले में जांच पर रोक और सियासी रार
सीपीआई (एम) के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पार्टी के लिए राहत भरा बताते हुए कहा कि वे इस राजनीतिक रूप से प्रेरित मामले का कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर मुकाबला करेंगे, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने केरल हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ विजयन और उनके परिवार की अपील पर विचार करने की अनुमति देते हुए जांच पर एक हफ्ते की रोक लगा दी है।
जिसमें एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस नेता रमेश चेन्नीथला ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर रद्द नहीं की है बल्कि केवल अपील दाखिल करने और पक्ष रखने के लिए जांच पर रोक लगाई है।
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और साथ ही स्पष्ट किया कि ईडी के पत्र पर पूरी कानूनी सलाह के बाद ही सरकार ने उचित कार्रवाई की है क्योंकि 15 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने विजयन, उनकी बेटी वीणा और दामाद मोहम्मद रियास की उस अपील को खारिज कर दिया था जिसमें एफआईआर के आदेश को चुनौती दी गई थी और अदालत ने कहा था कि भ्रष्टाचार के मामले में एफआईआर से पहले आरोपी को पक्ष रखने का अधिकार नहीं है, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था।
केरल सतर्कता ब्यूरो ने इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की थीं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि सीएमआरएल कंपनी ने पिनाराई विजयन की बेटी वीणा की अब बंद हो चुकी फर्म ‘एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस’ को आईटी सेवाओं के नाम पर ₹2.78 करोड़ दिए थे, जो जांच में पूरी तरह फर्जी पाए गए।
ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) के तहत मिले सबूतों के आधार पर कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट से मिली एक सप्ताह की अंतरिम राहत के बाद इस केस में आगे की कानूनी हलचल देखने वाली होगी।
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