बीसीसीआई पर कसेगा शिकंजा सुप्रीम कोर्ट ने नए खेल कानून पर मांगा जवाब

बीसीसीआई पर कसेगा शिकंजा सुप्रीम कोर्ट ने नए खेल कानून पर मांगा जवाब

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड BCCI और सभी राज्य क्रिकेट संघों से पूछा है कि उन्हें राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 के दायरे में क्यों नहीं लाया जाना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान बोर्ड और राज्य संघों के अधिकारियों की सेवा शर्तों को भी इस कानून के तहत लाने पर जवाब मांगा है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यों की बेंच ने मंगलवार को बीसीसीआई मामले की सुनवाई के दौरान यह सवाल उठाया।

इस बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। यह मामला साल 2014 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसमें समय-समय पर नई अर्जियां आती रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख

सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संघों के वकीलों से जवाब मांगा है कि उनके बड़े अधिकारियों के कार्यकाल और सेवा की शर्तें ‘राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025’ के दायरे में क्यों नहीं आनी चाहिए।

अदालत के इस सवाल के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि देश के सबसे अमीर खेल बोर्ड बीसीसीआई पर सरकार का यह नया खेल कानून किस तरह लागू होगा।

सुप्रीम कोर्ट में बीसीसीआई (BCCI) सुधार का मामला 2014 से चल रहा है। अदालत ने क्रिकेट प्रशासन को सुधारने के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश आर.एम. लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी।

लोढ़ा समिति ने बोर्ड के लिए नया संविधान और कई बड़े बदलाव सुझाए, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार करते हुए बीसीसीआई के संगठन और कामकाज में लागू किया।

पदाधिकारियों के कार्यकाल को लेकर भी नियम

सितंबर 2022 में बीसीसीआई अधिकारियों के कार्यकाल के नियमों में ढील दी थी। नए आदेश के तहत कोई भी पदाधिकारी राज्य क्रिकेट संघ और बीसीसीआई को मिलाकर लगातार कुल 12 साल तक पद पर रह सकता है।

इस व्यवस्था के अनुसार, वे लगातार 6 साल राज्य संघ में और उसके बाद लगातार 6 साल बीसीसीआई में काम कर सकते हैं। इसके बाद तीन साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड यानी पद से बाहर रहने की अवधि लागू होती है।

अदालत ने यह भी कहा था कि कोई पदाधिकारी बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संघ, दोनों स्तरों पर किसी विशेष पद पर लगातार दो कार्यकाल पूरा कर सकता है। इसके बाद उसे तीन साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड पूरा करना होगा।

पहले क्या था नियम

बीसीसीआई के पुराने नियम संविधान के अनुसार, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पहले मंजूरी दी थी, अगर कोई अधिकारी लगातार दो बार (तीन-तीन साल के लिए) अपने पद पर रह लेता था, तो उसे आगे चुनाव लड़ने से पहले तीन साल का ब्रेक (कूलिंग-ऑफ पीरियड) लेना पड़ता था।

अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि नया खेल शासन अधिनियम, 2026 बीसीसीआई पर कितना लागू होगा। कोर्ट ने इस पर जवाब मांगा है।


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Muskan Asif

मुस्कान आसिफ़ (ZH7TV) एक अनुभवी और रचनात्मक कंटेंट, डायनेमिक डिजिटल एडिटोरियल प्रोफेशनल पत्रकार हैं। जो बड़ी और असरदार खबरों का सटीक विश्लेषण करने में माहिर हैं। वे अपने नेटवर्क की पहुँच बढ़ाने के लिए बेहद आकर्षक वीडियो, टेक्स्ट और इंटरैक्टिव डिजिटल कंटेंट तैयार करती हैं।