अगर आकाश आनंद सपा में आना चाहें तो पार्टी में ले लेंगे? पत्रकार के सवाल पर क्या बोले अखिलेश यादव?
नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आकाश आनंद से जुड़े सवालों पर बेहद मजाकिया और तीखे अंदाज में जवाब दिया है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने तंज कसते हुए कहा अंकल शब्द के तो कई मायने हो सकते है।
चाचा, ताऊ, मौसा या फूफा, लेकिन हैरानी की बात है की कोई भी फूफा जी को लेकर सवाल नहीं उठा रहा है, सब सिर्फ फूफा पर ही अटके है क्या सब डर गए है। इसके साथ ही अखिलेश यादव ने साफ़ शब्दों में स्पष्ट कर दिया कि आकाश आनंद को लेकर उनकी पार्टी का स्टेंड बिलकुल अलग है और उनके बारे में फैसला लेना पूरी तरह बसपा का अपना अंदरूनी मामला है।
आकाश आनंद की पार्टी से मुक्ति
लखनऊ में पार्टी मुख्यालय पर आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मायावती द्वारा आकाश आनंद को पार्टी से मुक्त किए जाने के संदर्भ में कहा कि यदि वे आकाश को पार्टी में लेकर आएंगे तो सपा उन्हें स्वीकार कर लेगी और इस मामले में दूसरे दलों को कोई बात नहीं करनी चाहिए, जबकि इसके साथ ही उन्होंने सरकार पर आजम खान के खिलाफ अन्याय करने, राज्य में पत्रकारों पर मुकदमे दर्ज करने और बुलंदशहर में सपा कार्यक्रम के लिए पुलिस लाइन में पानी भरने का झूठा बहाना बनाकर अनुमति न देने का गंभीर आरोप लगाया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि 2027 के चुनाव में सपा की सरकार बनने पर आउटसोर्सिंग व्यवस्था पूरी तरह खत्म की जाएगी और पार्टी राज्य के घोषणापत्र के साथ-साथ प्रत्येक जिले के लिए अलग स्थानीय घोषणापत्र भी तैयार करेगी, तथा उन्होंने दोहराया कि वे 80 की 80 लोकसभा सीटें जीतने के बावजूद ईवीएम के खिलाफ रहेंगे और उच्च न्यायालयों से बीजेपी (BJP) के नकारात्मक एआई वीडियो का स्वतः संज्ञान लेने की अपील की।
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दूसरी ओर, बहुजन समाज पार्टी के पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति व सामाजिक जीवन से संन्यास लेने और मायावती के लिए जान तक देने की बात कहने के तुरंत बाद बसपा प्रमुख मायावती ने उनके दामाद आकाश आनंद को भी पार्टी से पूरी तरह से मुक्त कर दिया है।
अशोक सिद्धार्थ के माफ़ीनामे वाली पोस्ट पर मायावती ने पलटवार करते हुए उन पर नियत में खोट होने का सीधा आरोप लगया है।बसपा प्रमुख ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तीखे शब्दों में कहा की अगर सिद्धार्थ को अपने दामाद आकाश आनंद के भविष्य और बहुजन आंदोलन की रती भर भी फ़िक्र होती, तो वे बिना कोई नाटक किए बुधवार को ही राजनीति छोड़ने का एलान कर देते। मायावती के मुताबिक, इस फैसले में की गई देरी साफ दर्शाती है की अशोक सिद्धार्थ के मन में अभी भी स्वार्थ भरा है और उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं पूरी तरह ख़त्म नहीं हुई है।
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