जस्टिस स्वर्णकांता अवमानना केस में पेश नहीं हुए AAP के सभी 6 नेता, नोटिस जारी

जस्टिस स्वर्णकांता अवमानना केस में पेश नहीं हुए AAP के सभी 6 नेता, नोटिस जारी

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट से आम आदमी पार्टी (AAP) के शीर्ष नेतृत्व के लिए एक बड़ी और परेशान करने वाली खबर सामने आई है।

हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित अपमानजनक और भ्रामक अभियान चलाने के मामले में आपराधिक अवमानना केस की सुनवाई के दौरान आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत कोई भी नेता कोर्ट में पेश नहीं हुआ, जिसके बाद अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी को नोटिस जारी किया है।

AAP के किन 6 नेताओं को मिला नोटिस?

दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच ने जिन नेताओं को आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, उनमें अरविंद केजरीवाल (पूर्व मुख्यमंत्री, दिल्ली), मनीष सिसोदिया (पूर्व उपमुख्यमंत्री, दिल्ली), संजय सिंह (सांसद, राज्यसभा), सौरभ भारद्वाज (कैबिनेट मंत्री, दिल्ली सरकार), दुर्गेश पाठक (विधायक एवं ‘आप’ नेता) और विनय मिश्रा (‘आप’ नेता) शामिल हैं।

कोर्ट में क्या हुआ?

न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर दुडेजा की खंडपीठ (Division Bench) ने इस मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान ‘आप’ के इन सभी 6 नेताओं की तरफ से कोई भी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ।

4 हफ्ते का समय: हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी नेताओं को नोटिस जारी किया है और अपनी सफाई/जवाब दाखिल करने के लिए 4 हफ्ते का समय दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 4 अगस्त 2026 को होगी।

डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के आदेश:

कोर्ट ने रजिस्ट्री को सख्त निर्देश दिए हैं कि सोशल मीडिया, वीडियो और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर मौजूद उन सभी कथित विवादित सामग्रियों और पोस्ट के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जाए, ताकि उन्हें कोर्ट के आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जा सके। इसके साथ ही कोर्ट इस मामले में एक ‘एमिकस क्यूरी’ (अदालत का मित्र) भी नियुक्त करेगा।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद दिल्ली आबकारी नीति (Delhi Excise Policy Case) से जुड़ा हुआ है। इस मामले में निचली अदालत ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और कविता सहित सभी 23 आरोपियों को बरी (Discharge) कर दिया था, जिसके खिलाफ सीबीआई (CBI) ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। इस मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा कर रही थीं।

‘आप’ नेताओं ने जस्टिस शर्मा से इस केस की सुनवाई से अलग होने (Recusal) की मांग की थी, जिसे जज ने खारिज कर दिया था। जस्टिस शर्मा के मुताबिक, इसके बाद उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर एक सुनियोजित और एडिटेड वीडियो अभियान चलाया गया।

जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की सख्त टिप्पणी:

“अदालत के भीतर सम्मान दिखाने का नाटक किया गया और बाहर मेरे खिलाफ डिजिटल नैरेटिव गढ़ा गया। एक लॉ कॉलेज में दिए गए मेरे पुराने भाषण के वीडियो को एडिट करके इस तरह पेश किया गया जैसे मैं किसी राजनीतिक दल (भाजपा) के कार्यक्रम में बोल रही हूं। प्रतिवादी चाहते थे कि मैं डर जाऊं और इस केस से हट जाऊं। यह न्यायपालिका को डराने-धमकाने और उसकी निष्पक्षता पर संवैधानिक चोट करने की कोशिश थी।”

खुद केस से अलग हुईं, मामला दूसरी बेंच को सौंपा

जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने स्पष्ट किया कि वह ‘आप’ नेताओं के दबाव में पीछे नहीं हट रही हैं, लेकिन चूंकि उन्होंने खुद इन नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की है, इसलिए न्यायिक शुचिता और निष्पक्षता (Judicial Propriety) को बनाए रखने के लिए वह मुख्य आबकारी मामले की सुनवाई अब नहीं करेंगी। उन्होंने मुख्य मामले को दूसरी बेंच (जस्टिस मनोज जैन की पीठ) को ट्रांसफर कर दिया, जबकि अवमानना का मामला अब जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की खंडपीठ देख रही है।


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Raja Zaid

"राजा ज़ैद एक जाने-माने पत्रकार हैं। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ राजनीति और सामायिक विषयो की कवरेज का 15 वर्षो से अधिक का अनुभव है।