उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री पर सेंसर बोर्ड की रोक: IIIT-हैदराबाद में मची रार
नई दिल्ली: हैदराबाद के आईआईआईटी कॉलेज में आज शुक्रवार को जेल में बंद एक्टिविस्ट उमर खालिद पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म दिखाई जानी थी लेकिन सेंसर बोर्ड ने इस पर रोक लगा दी है। सेंसर बोर्ड ने फिल्म की स्क्रीनिंग शुरू होने से ठीक पहले इस पर कड़ा ऐतराज जताया।
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) द्वारा बिना सर्टिफिकेट वाली फिल्मों की पब्लिक स्क्रीनिंग को सिनेमैटोग्राफ एक्ट का उल्लंघन बताए जाने और IIIT-हैदराबाद को टैग कर जरूरी कार्रवाई की चेतावनी देने के बाद, सूत्रों के मुताबिक छात्रों के एक ग्रुप द्वारा आज शुक्रवार रात 8 बजे इंस्टीट्यूट के KRB ऑडिटोरियम में ललित वचानी द्वारा डायरेक्ट की गई और उमर खालिद पर केंद्रित डॉक्यूमेंट्री ‘प्रिजनर नंबर 626710 इज प्रेजेंट’ की प्रस्तावित स्क्रीनिंग को रद्द करने का फैसला किया गया है।
कॉलेज का पल्ला झाड़ा; अनधिकृत स्क्रीनिंग से किया इनकार
जबकि इस बीच इंस्टीट्यूट ने अपने बयान में साफ किया है कि न तो उसने और न ही उसके किसी मान्यता प्राप्त स्टूडेंट क्लब ने ऐसी किसी अनधिकृत फिल्म की स्क्रीनिंग का आयोजन या मेजबानी की है क्योंकि कैंपस के ऑफिशियल इवेंट्स के लिए तय प्रक्रियाएं हैं और व्यक्तिगत मुलाकातों को इंस्टीट्यूट के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं माना जाना चाहिए।
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वहीं इससे पहले बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी में भी ‘लॉ एंड सोसाइटी कमेटी’ द्वारा ‘पॉलिटिकल प्रिजनर्स डे’ और उमर खालिद की जेल के छह साल पूरे होने पर इसी डॉक्यूमेंट्री की प्रस्तावित स्क्रीनिंग का एबीवीपी द्वारा यह कहते हुए विरोध किया गया था कि यह कैंपस का राजनीतिक प्रचार के लिए इस्तेमाल है, जिसके चलते छात्र कमेटी ने लॉजिस्टिकल व सुरक्षा कारणों का हवाला देकर कार्यक्रम को ट्राइमेस्टर के दौरान बाद में करने की बात कहते हुए टाल दिया था।
इस मामले में उमर खालिद पर आतंकवाद विरोधी कड़े कानून यूएपीए’ (UAPA) समेत कई अन्य गंभीर धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज है और वे पकडे जाने के बाद से ही लगातार जेल में बंद है। उन पर साल 2020 में दिल्ली में भड़के दंगो की साजिश रचने का मुख्य आरोप है। गिरफ़्तारी के बाद से अदालत द्वारा उनकी जमानत याचिकाएं कई बार ख़ारिज की जा चुकी है जिसकी वजह से उन्हें अब तक सलाखों के पीछे ही रहना पड़ा है।
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