पंजाब कांग्रेस नेतृत्व विवाद पर नरम पड़े चन्नी, बोले- ऑल इज वेल

पंजाब कांग्रेस नेतृत्व विवाद पर नरम पड़े चन्नी, बोले- ऑल इज वेल

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद के विवाद पर केसी वेणुगोपाल से तीन घंटे की बैठक के बाद पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के तेवर नरम पड़ गए और उन्होंने आलाकमान के फैसले को सर्वोपरि बताते हुए पार्टी में सब ठीक होने का दावा किया

पंजाब: कांग्रेस में जारी नेतृत्व विवाद के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल से तीन घंटे से अधिक समय तक मुलाकात की।

इस अहम बैठक के बाद चन्नी के तेवर काफी नरम दिखे और उन्होंने घोषणा की कि पार्टी के भीतर अब सब कुछ ठीक है। चन्नी ने कहा कि पार्टी में सभी नेता आलाकमान के फैसले के साथ हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सिर्फ अपना पक्ष रखना चाहते थे और पार्टी को शर्मिंदा करने का उनका कोई इरादा नहीं था। अब जब आलाकमान ने फैसला ले लिया है, तो विवाद पूरी तरह सुलझ चुका है।

दरअसल, चन्नी ने अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बनाए रखने के फैसले का कड़ा विरोध किया था, जिसके बाद यह संकट गहराया था।

इस बैठक के बाद जब परगत सिंह और राणा गुरजीत सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं से नतीजों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने किसी भी तरह की सीधी टिप्पणी से परहेज किया।

हालांकि, सभी नेताओं ने बार-बार यही दोहराया कि पार्टी में एकजुटता है और वे राहुल गांधी के प्रति पूरी तरह वफादार रहते हुए पार्टी के आदेशों के अनुसार काम करेंगे।

सूत्रों के मुताबिक, चन्नी ने इस विवाद के सिलसिले में राहुल गांधी से मुलाकात का समय लेने की कोशिश भी की थी, लेकिन कथित तौर पर उन्हें समय नहीं मिल सका।

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस नेतृत्व ने 1 जुलाई को घोषणा की थी कि अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ही पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे।

चन्नी ने इस फैसले का खुलकर विरोध किया था और कुछ वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर नेतृत्व परिवर्तन की मांग को लेकर एक अभियान छेड़ दिया था।

विवाद को सुलझाने के लिए ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है।

सूत्रों के अनुसार, इस रिपोर्ट में वडिंग को ही प्रदेश अध्यक्ष पद पर बरकरार रखने की मजबूत सिफारिश की गई है।

रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि पंजाब के 29 जिला अध्यक्षों में से 25 और सात सांसदों में से चार पूरी तरह राजा वडिंग के समर्थन में हैं।

दिल्ली में वेणुगोपाल से मुलाकात के बाद बघेल ने भी साफ संकेत दे दिया कि पंजाब के नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि यह कोई बच्चों का खेल नहीं है।

पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है और कांग्रेस पार्टी अभी से इसकी तैयारियों में जुटी हुई है।

चुनाव के मद्देनजर नई कांग्रेस टीम की नियुक्ति के बाद प्रभारी भूपेश बघेल ने चंडीगढ़ का दौरा कर कई नेताओं से मुलाकात की थी।

अपने दौरे के आखिरी दिन उन्होंने चन्नी के नेतृत्व वाले असंतुष्ट गुट के नेताओं से भी बातचीत की थी, जिसके बाद अब दिल्ली में हुई इस तीन घंटे की लंबी बैठक के बाद पंजाब कांग्रेस का यह अंदरूनी घमासान थमता नजर आ रहा है।


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Mehak B