कांग्रेस का बीजेपी पर वार: यूरेनियम आपूर्ति का श्रेय लेने को बताया राजनीतिक ‘यू-टर्न

कांग्रेस का बीजेपी पर वार: यूरेनियम आपूर्ति का श्रेय लेने को बताया राजनीतिक ‘यू-टर्न

ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम आपूर्ति पर कांग्रेस ने बीजेपी को घेरते हुए कहा कि इसका श्रेय मनमोहन सिंह सरकार के 2008 के परमाणु समझौते को जाता है, जिसका बीजेपी ने तब विरोध किया था

 

नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की व्यावसायिक आपूर्ति मिलने के फैसले को बीजेपी द्वारा एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी बताने पर कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बीजेपी और उसके समर्थकों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सत्ताधारी दल का पूरा तंत्र इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत सफलता के रूप में पेश करने में जुटा हुआ है, जबकि वास्तविकता इससे कोसों दूर है।

जयराम रमेश ने इतिहास का हवाला देते हुए याद दिलाया कि 4 दिसंबर 2011 को ही ऑस्ट्रेलिया की तत्कालीन प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने अक्टूबर 2008 के ऐतिहासिक भारत-अमेरिका परमाणु समझौते (Indo-US Nuclear Agreement) के मद्देनजर अपनी लेबर पार्टी से भारत को यूरेनियम बेचने की मंजूरी हासिल कर ली थी।

बीजेपी ट्रोल्स और सांसदों पर तंज

कांग्रेस नेता ने बीजेपी सांसदों और सोशल मीडिया ट्रोल्स पर तंज कसते हुए कहा कि इन सभी को अपना ‘होमवर्क’ बेहतर तरीके से करने की जरूरत है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया ने साल 2011 में ही भारत को परमाणु निर्यात पर लगा अपना प्रतिबंध हटा दिया था।

मोदी सरकार से तीखे सवाल

इसके साथ ही कांग्रेस ने मोदी सरकार के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करते हुए पूछा है कि अगर भारत वाकई इतना भरोसेमंद रणनीतिक भागीदार था, तो 5 सितंबर 2014 को हुए द्विपक्षीय परमाणु सहयोग समझौते को जमीन पर लागू होने में पूरे 11 साल का लंबा वक्त क्यों लग गया।

मनमोहन-बुश मुलाकात और 2008 का कानून

जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि आज गर्व से यूरेनियम आपूर्ति की घोषणा की जा रही है, लेकिन यह सब केवल भारत-अमेरिका परमाणु सहयोग समझौते की वजह से ही संभव हो पाया है जो 8 अक्टूबर 2008 को कानून बना था, और इसकी बुनियाद जुलाई 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की मुलाकात के दौरान रखी गई थी।

अपने बयान में कांग्रेस ने बीजेपी की पुरानी नीति पर हमला बोलते हुए कहा कि जब डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार इस ऐतिहासिक और बदलाव लाने वाले परमाणु समझौते को अमलीजामा पहना रही थी, तब बीजेपी ने संसद के भीतर और बाहर, दोनों ही जगह इसका पुरजोर विरोध किया था।

कांग्रेस का ‘यू-टर्न’ का आरोप

कांग्रेस का कहना है कि उनकी पार्टी देश के विकास के लिए ‘टर्निंग पॉइंट’ बनाती है, जबकि बीजेपी केवल ‘यू-टर्न’ लेने में माहिर है।

यह पूरा राजनीतिक विवाद उस समय गरमाया जब भारत और ऑस्ट्रेलिया ने वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान सिविल न्यूक्लियर एनर्जी, समुद्री सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) क्षेत्रों से जुड़े कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बानीज ने शांतिपूर्ण और सुरक्षित हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र सुनिश्चित करने में दोनों देशों की साझेदारी को बेहद अहम बताया था।

यूरेनियम की कमर्शियल सप्लाई का समझौता

इसी सिविल न्यूक्लियर एनर्जी समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया अब भारत के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों (न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स) के लिए यूरेनियम की कमर्शियल सप्लाई शुरू करने जा रहा है, जो कि दोनों देशों के बीच हुए शुरुआती परमाणु सहयोग समझौते के 10 साल से भी अधिक समय बीत जाने के बाद आखिरकार धरातल पर उतर रहा है।


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Muskan Asif

मुस्कान आसिफ़ (ZH7TV) एक अनुभवी और रचनात्मक कंटेंट, डायनेमिक डिजिटल एडिटोरियल प्रोफेशनल पत्रकार हैं। जो बड़ी और असरदार खबरों का सटीक विश्लेषण करने में माहिर हैं। वे अपने नेटवर्क की पहुँच बढ़ाने के लिए बेहद आकर्षक वीडियो, टेक्स्ट और इंटरैक्टिव डिजिटल कंटेंट तैयार करती हैं।