मतदाता का शक दूर होना जरुरी: वोटिंग मशीन पर बसपा प्रमुख का हमला
नई दिल्ली: बसपा प्रमुख मायावती ने EVM की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए चुनावी व्यवस्था में सुधार की वकालत की है। उन्होंने साफ़ कहा कि लोकतंत्र को जिंदा रखने के लिए यह बहुत जरुरी है कि जनता के मन में अपने वोट को लेकर रती भर भी शक न रहे।
मायावती के मुताबिक अगर मतदाताओं को यह लगने लगे कि उनका वोट उनके पसंदीदा उम्मीदवार के बजाय किसी और के खाते में जा रहा है तो इससे पूरी चुनाव प्रणाली पर से लोगों का भरोसा उठ जाएगा जो देश के लिए बेहद खतरनाक होगा।
देश में शुरुआती चुनावों के बाद करीब पांच दशक तक बैलेट पेपर का इस्तेमाल हुआ था, लेकिन कांग्रेस सरकार के दौरान चुनाव आयोग ने ईवीएम व्यवस्था शुरू की और जब तब विपक्ष में रही भाजपा ने भी इस पर गड़बड़ी के आरोप लगाए थे, बावजूद इसके केंद्र में सरकार आने पर भाजपा ने इस प्रणाली को क्यों नहीं खत्म किया।
वीवीपैट पर्चियों के मिलान की मांग
बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी ने शुरू से ही दबे-कुचले और कम पढ़े-लिखे वर्गों के बीच ईवीएम को लेकर मौजूद आशंकाओं के चलते इसका विरोध किया है और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर वीवीपैट की व्यवस्था तो शुरू कराई, लेकिन सभी पर्चियों का मिलान न होने और मशीनों के संभावित छेड़छाड़ या हैक होने की आशंका के कारण मतदाताओं का इस पर पूरा भरोसा बन पाना कठिन है।
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इसके साथ ही, उन्होंने नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद की जीत और उनकी कार्यशैली पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि स्थानीय समर्थन न होने के बावजूद उन्हें भाजपा की साजिश और ईवीएम में गड़बड़ी के जरिए बसपा को नुकसान पहुंचाने के लिए जिताया गया, जबकि वे दलितों के मामलों में सीधे अधिकारियों से बात करने के बजाय केवल धरना-प्रदर्शन करवाते हैं, जिससे युवाओं पर कानूनी मामले दर्ज होते हैं और उन्हें सरकारी नौकरी पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
बसपा प्रमुख मायावती ने दिल्ली, पंजाब और देश के अन्य राज्यों में बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि देश में सुरक्षा के हालात ख़राब होना एक बेहद गंभीर मामला है। मायावती ने सभी संबधित राज्य सरकारों से अपील की है कि वे जनता की भलाई और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए तुरंत कड़े और उचित कदम उठाएं।
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