‘फॉर्म 6’ बदलाव विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर तत्काल रोक से किया इनकार, मांगा जवाब
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या उनके काम पर रोक लगाने की अंतरिम मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत कोई भी आदेश देने से साफ मन कर दिया है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि वह सिर्फ आरोपों के आधार पर जल्दबाजी में ऐसा कोई कदम नहीं उठा सकती।
बता दे कि इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव आयोग के अन्य दोनों कमिश्नरों को भरोसे में लिए बिना कई बड़े फैसले पूरी तरह एकतरफा दंग से लिए है जो नियमो के खिलाफ है।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की पीठ ने चुनाव आयोग के जवाब और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर आरोपों की जांच करने का संकेत दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आयोग के जवाब से यह साबित होता है कि आवश्यक सर्वसम्मति के बिना फैसले लिए गए थे, तो उन पर विचार कर उन्हें वापस लेने या रद्द किया जा सकता है।
कामकाज रोकने और कानूनी कार्रवाई की मांग:
यह मामला राकेश कुमार सिंह और अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर निर्णय प्रक्रिया में सामूहिक व्यवस्था का पालन न करने और दोनों अन्य आयुक्तों की सहमति के बिना व्यक्तिगत अधिकारों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है।
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याचिकाओं में यह भी मांग की गई है कि CEC ज्ञानेश कुमार को अंतिम सुनवाई तक कार्य न करने दिया जाए और आयोग का संचालन अन्य दोनों आयुक्तों की सर्वसम्मत राय से हो, साथ ही 2023 के कानून की धारा 18 का हवाला देते हुए आपराधिक कार्यवाही की मांग भी की गई है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सीईसी के खिलाफ कोई अंतरिम कार्रवाई नहीं की है और पहले निर्वाचन आयोग का पक्ष जानने का निर्णय लिया है।
याचिका में पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज किए जाने और मतदाता पंजीकरण के लिए ‘फॉर्म 6’ में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ी शर्तें सॉफ्टवेयर के जरिए जोड़े जाने का आरोप भी शामिल है, जबकि चुनाव आयोग ने सभी आदेशों को कानूनी रूप से वैध बताया है। अगली सुनवाई में चुनाव आयोग के जवाब से यह स्पष्ट होगा कि उठाए गए कदम नियमों के अनुरूप थे या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट में पेश इस याचिका में गोवा और पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट से जुडी कई तकनीकी कमियां भी उजागर की गई है। आरोप है कि गोवा में आदेश के बावजूद चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के चलते 97 योग्य नागरिकों के नाम दोबारा नहीं जोड़े जा सके, जबकि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में सुधार की 16.10 लाख से अधिक अपीलें आज भी अधूरी लटकी हुई हैं ।
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