के. कविता ने लॉन्च की अपनी नई पार्टी; ‘TRS’ नाम से शुरू किया राजनीतिक सफर
तेलंगाना: के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) की बेटी के. कविता ने आज, 25 अप्रैल 2026 को आधिकारिक रूप से अपनी नई राजनीतिक पार्टी लॉन्च कर दी है। इस नई पार्टी का नाम तेलंगाना राष्ट्र सेना (TRS) रखा गया है।
के. कविता ने अपनी नई पार्टी का नाम वही रखा है जो कभी उनके पिता की पार्टी (BRS) का मूल नाम था। उन्होंने ‘तेलंगाना राष्ट्र सेना’ (TRS) नाम चुनकर क्षेत्रीय भावनाओं को फिर से जगाने की कोशिश की है। पार्टी की घोषणा हैदराबाद के बाहरी इलाके मुनीराबाद (मेडचल जिला) में एक बड़े कार्यक्रम के दौरान की गई। कविता ने बताया कि उनकी पार्टी 5 मुख्य स्तंभों पर काम करेगी: शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्यमिता और सामाजिक न्याय।
के. कविता का अपनी पुरानी पार्टी (BRS) और परिवार के साथ विवाद काफी समय से चर्चा में था। कविता को सितंबर 2025 में ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ के आरोप में BRS से निलंबित कर दिया गया था। बताया जा रहा है कि उनके अपने भाई और BRS के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव (KTR) के साथ गहरे मतभेद थे। उन्होंने आरोप लगाया कि BRS अब तेलंगाना की मूल आत्मा खो चुकी है। लेकिन लॉन्च के दौरान कविता ने भावुक होते हुए कहा, हमने पार्टी नहीं छोड़ी, बल्कि हमें निकाला गया। अब BRS वो पार्टी नहीं रही जो तेलंगाना आंदोलन के समय थी।
कविता ने कटाक्ष करते हुए कहा कि KCR अब अपने परिवार (संकेत KTR की ओर) और कुछ खास सलाहकारों के घेरे में फंस गए हैं। उन्होंने कहा कि पिता को अब सच बताने वाला कोई नहीं बचा है, क्योंकि जो सच बोलता है, उसे पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।
इसे भी पढ़ें: सपा नेताओं के विवादित पोस्टरों पर बवाल, पुलिस से एक्शन की मांग
के. कविता ने अपनी नई पार्टी के लॉन्च के दौरान अपने पिता और BRS प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (KCR) पर जो कटाक्ष किए, वे काफी तीखे और भावनात्मक थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब उनके और उनके पिता के राजनीतिक रास्ते पूरी तरह अलग हो चुके हैं।
कविता ने सबसे बड़ा हमला KCR की कार्यशैली पर किया। उन्होंने कहा कि एक समय था जब KCR जनता के बीच रहते थे, लेकिन अब वे ‘प्रगति भवन’ (मुख्यमंत्री आवास, जिसे अब ज्योतिराव फुले प्रजा भवन कहा जाता है) की ऊंची दीवारों के पीछे सिमट गए हैं। उनका इशारा था कि KCR अब जमीनी कार्यकर्ताओं और आम जनता की पहुंच से बाहर हो गए हैं।
उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि जिस तेलंगाना राष्ट्र सेना (TRS) ने राज्य के लिए लड़ाई लड़ी थी, उसका नाम बदलकर भारत राष्ट्र सेना (BRS) करना एक बड़ी भूल थी। मेरे पिता ने राष्ट्रीय राजनीति के चक्कर में तेलंगाना की अस्मिता को ताक पर रख दिया। जो पार्टी कल तक किसानों और युवाओं की बात करती थी, वह अब केवल बड़े कॉर्पोरेट्स और सत्ता के खेल में उलझ गई है।”
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
