TMC नेता कीर्ति आज़ाद का दावा: तमाम कोशिशों के बावजूद बंगाल में ऑपरेशन लोटस विफल
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की देखरेख में बंगाल में चलाया जा रहा भाजपा का ‘ऑपरेशन लोटस’ पूरी तरह से विफल साबित हुआ है। टीएमसी सांसदों को डराया धमकाया गया। उनके घरों को तोड़ने और जांच एजेंसियों का भय दिखाकर दवाब बनाया गया
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे घमासान के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद कीर्ति आज़ाद ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है।
आजाद ने कहा, ‘‘(गृह मंत्री) अमित शाह के मार्गदर्शन में ऑपरेशन लोटस चल रहा है।’’ उन्होंने दावा किया कि यह अभियान अब तक सफल नहीं हो पाया है।
कीर्ति आज़ाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट साझा करते हुए दावा किया है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की देखरेख में बंगाल में चलाया जा रहा भाजपा का ‘ऑपरेशन लोटस’ पूरी तरह से विफल साबित हुआ है। उन्होंने भाजपा पर टीएमसी सांसदों को डराने-धमकाने, उनके घरों को तोड़ने और जांच एजेंसियों का भय दिखाकर दवाब बनाने का गंभीर आरोप लगाया है।
सांसदों को डराया गया, घर तोड़े गए: कीर्ति आज़ाद
मीडिया से बात करते हुए और अपने एक्स पोस्ट में कीर्ति आज़ाद ने आरोप लगाया कि भाजपा उन टीएमसी सांसदों पर बगावत करने के लिए भारी दबाव बना रही है, जिन्होंने शुरुआती दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया था।
उन्होंने दावा किया, “भाजपा के लोग सांसदों के घरों में जबरन बैठ रहे हैं, बाहर पुलिस का पहरा लगा दिया गया है। कई सांसदों के घरों में तोड़फोड़ और और उनके दफ्तरों को नेस्तनाबूद किया गया है।”
आज़ाद ने पहली बार सांसद बने बापी हालदार और मिताली बाग का उदाहरण देते हुए कहा कि बापी हालदार का घर पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया, जिसके बाद डर और दबाव में आकर कांपते हुए उन्होंने दस्तखत किए।
‘नकली और मनगढ़ंत’ है 20 बागी सांसदों की सूची
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही टीएमसी के 20 बागी सांसदों की उस सूची को कीर्ति आज़ाद ने पूरी तरह ‘फर्जी और मनगढ़ंत’ बताया है, जिसमें दावा किया जा रहा था कि यह गुट एनडीए (NDA) सरकार को समर्थन देने जा रहा है।
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आज़ाद ने साफ किया कि इस सूची में शामिल कम से कम 6 सांसदों ने किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने की बात से साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा कि दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत सदन में किसी भी अलग गुट की मान्यता के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। टीएमसी के पास लोकसभा में 28 सांसद हैं, जिसके लिहाज से अलग होने के लिए 19 सांसदों की आवश्यकता होगी, लेकिन भाजपा के पास 16 सांसदों का नाम भी नहीं है।
निशिकांत दुबे और सुवेंदु अधिकारी पर साधा निशाना
कीर्ति आज़ाद ने इस पूरे सियासी ड्रामे की स्क्रिप्टिंग का केंद्र भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के आवास को बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यसभा सदस्य प्रकाश चिक बड़ाइक के इस्तीफे से लेकर सुवेंदु अधिकारी का टीएमसी सांसदों के घर फूल लेकर पहुंचने तक, सब कुछ भाजपा के ‘डर्टी ट्रिक्स डिपार्टमेंट’ का हिस्सा है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि दबाव बनाने के लिए सरकार ने उनकी खुद की सुरक्षा और होमगार्ड्स को वापस ले लिया है, लेकिन वह इन ओछी हरकतों के आगे घुटने नहीं टेकेंगे और मजबूती से ‘दीदी’ (ममता बनर्जी) के साथ खड़े रहेंगे।
बागी लोकसभा सांसदों की सूची
तृणमूल में उथल-पुथल के बीच पार्टी के 19 लोकसभा सांसदों के नाम और हस्ताक्षरों वाली एक कथित सूची ऑनलाइन प्रसारित हुई। हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को संबोधित कथित पत्र सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
बागी तृणमूल नेताओं ने दावा किया कि इस दस्तावेज से उनके कदम के समर्थन का संकेत मिलता है। इस दस्तावेज की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी।
सूची में काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हलदर, शर्मिला सरकार, प्रसून बंद्योपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार मल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, सायोनी घोष, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग, माला रॉय, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी, जून मालिया और पार्थ भौमिक के हस्ताक्षर थे।
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