टीएमसी ने ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी से निष्कासित कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने टीएमसी के नाराज विधायकों के एक गुट से मुलाकात की और आगे की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा की।
नई दिल्ली: बंगाल की राजनीति में जारी उथल-पुथल के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्रनाथ बोस के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी गई है। टीएमसी नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय की ओर से दायर याचिका पर 11 जून को सुनवाई होगी।
यह विवाद उस समय गहरा गया जब टीएमसी के 80 में से 58 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट का समर्थन करते हुए विधानसभा में विपक्षी खेमे पर दावा पेश किया था।
विधानसभा स्पीकर ने इस दावे को स्वीकार करते हुए कहा कि ऋतब्रत बनर्जी और बागी विधायक संदीपन साहा का निष्कासन पार्टी संविधान के अनुरूप नहीं था, इसलिए उसे वैध नहीं माना जा सकता।
दूसरी तरफ, टीएमसी ने इस निर्णय को कानून और पार्टी नियमों के विरुद्ध बताते हुए तर्क दिया है कि किसी निष्कासित सदस्य को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा नहीं दिया जा सकता। पार्टी अब कोर्ट में स्पीकर द्वारा संविधान की व्याख्या किए जाने के अधिकार पर भी सवाल उठाने की तैयारी में है।
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"राजा ज़ैद एक जाने-माने पत्रकार हैं। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ राजनीति और सामायिक विषयो की कवरेज का 15 वर्षो से अधिक का अनुभव है।