राहुल गांधी पर आपत्तिजनक टिप्पणी: पूर्व IAF अफसर की पोस्ट पर कांग्रेस का कड़ा रुख
नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तुलना मुंबई आतंकी हमले के दोषी अजमल कसाब से करने वाले एक सोशल मीडिया पोस्ट देश की राजनीति गरमा गई है।
इस आपत्तिजनक पोस्ट के खिलाफ कांग्रेस सेवादल की लीगल सेल ने पुलिस की साइबर सेल में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। यह शिकायत भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त फ्लाइट लेफ्टिनेंट अनूप वर्मा के खिलाफ दर्ज की गई है।
वर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर राहुल गांधी और आतंकी कसाब की तस्वीरों का एक कोलाज पोस्ट किया था। इस तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा कि उनकी नजर में बाईं तरफ दिख रहा व्यक्ति (राहुल गांधी) देश के लिए कसाब से भी ज्यादा खतरनाक है।
इस पोस्ट के सामने आते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं में भारी आक्रोश है और उन्होंने इसे विपक्ष के नेता की सुरक्षा और सम्मान पर एक बेहद घटिया हमला करार दिया है।
मर्यादा लांघने वाले पोस्ट पर कांग्रेस का कड़ा रुख
कांग्रेस सेवादल की लीगल सेल ने स्पष्ट किया है कि पार्टी और उसके नेताओं को निशाना बनाने वाले ऐसे दुर्भावनापूर्ण कृत्यों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और इस मामले में संविधान, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और प्रासंगिक साइबर कानूनों के तहत कड़े कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
संगठन ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत प्रदत्त अधिकारों पर कानून के दायरे में उचित प्रतिबंध भी लागू होते हैं और जवाबदेही तय होनी चाहिए।
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इस बीच, सेवानिवृत्त वायुसेना अधिकारी सार्जेंट कर्मवीर सिंह ने भी इस पोस्ट पर आपत्ति जताते हुए कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है और नेताओं की नीतियों की आलोचना की जा सकती है, लेकिन उनकी तुलना किसी दोषी आतंकवादी से करना मर्यादा के विरुद्ध है।
अजमल कसाब साल 2008 में मुंबई पर हुए भयानक आतंकी हमले का मुख्य चेहरा था, और वह इकलौता ऐसा हमलावर था जिसे सुरक्षाबलों ने जिंदा दबोचा था।
पाकिस्तान से आए इन आतंकियों की अंधाधुंध गोलीबारी में 166 बेकसूर लोगों की जान चली गई थी और 238 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
पकड़े जाने के बाद कसाब पर देश की सबसे सुरक्षित अदालतों में मुकदमा चला। मुंबई की विशेष अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक, सभी ने उसके जुर्म की गंभीरता को देखते हुए फांसी की सजा सुनाई। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 21 नवंबर 2012 को पुणे की यरवदा जेल में उसे चुपचाप फांसी दे दी गई थी।
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