मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष एकजुट, कई राज्यों में कांग्रेस का मार्च
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के काम करने के तरीके को लेकर देश में राजनीतिक तनाव काफी बढ़ गया है, जिसके विरोध में आज देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
कई विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाने और आयोग के फैसलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
चुनाव आयोग के खिलाफ सड़क पर उतरी कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में आज मध्य प्रदेश, असम, दिल्ली और पंजाब समेत कई राज्यों में राज्य चुनाव आयोग के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन और मार्च निकाले जा रहे हैं।
दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव और एआईसीसी दिल्ली प्रभारी काजी निजामुद्दीन के नेतृत्व में प्रदर्शन आयोजित किया गया है, जबकि पंजाब में कांग्रेस नेता सचिन पायलट के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की गई है।
इसके अलावा, भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) ने भी दोपहर एक बजे चुनाव आयोग के कार्यालय का घेराव करने का एलान किया है।
विपक्ष के अन्य दलों ने भी इस आंदोलन में पूरी ताकत झोंक दी है। बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने आज सभी जिला मुख्यालयों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन करने का निर्णय लिया है।
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समाजवादी पार्टी और टीएमसी समेत कई अन्य विपक्षी दलों ने भी राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों का पुरजोर समर्थन किया है। इसके साथ ही, वामपंथी दलों (CPI, CPI(M), CPI(ML)-लिबरेशन, RSP और AIFB) ने संयुक्त रूप से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक देशव्यापी विरोध कार्यक्रमों की घोषणा की है।
यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब एक मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि पिछले 10 महीनों के दौरान विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत दो चुनाव आयुक्तों ने आयोग के फैसलों पर 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची से जुड़े कई विवादास्पद मामलों और प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए थे। साथ ही, एसआईआर के दौरान देशभर में ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने के खुलासे ने राजनीतिक दलों को और हमलावर बना दिया है।
चुनाव आयोग को लेकर चल रहे विवाद के बीच विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर हमले तेज कर दिए है। राहुल गांधी ने इसे ‘वोट चोरी’ बताते हुए इस्तीफे की मांग की है, जबकि अखिलेश यादव ने उन पर सरकार के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है।
दूसरी तरफ, प्रियंका गांधी ने उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने की बात कही है, वहीं CJP ने चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे में इस्तीफा नहीं मिला तो वे देश भर में बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।
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