रामलीला मैदान से विपक्ष की हुंकार: लोकतंत्र और वोट के अधिकार पर मोदी सरकार को घेरा
नई दिल्ली: दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की महारैली के दौरान विपक्षी नेताओ ने एकजुट होकर केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोले। इस बड़ी जनसभा में कांग्रेस, सपा, टीएमसी और जेएमएम सहित कई प्रमुख विपक्षी दलों के नेता और कायकर्ताओं शामिल हुए।
रैली के मंच से विपक्ष ने मुख्य रूप से लोकतंत्र को बचाने, जनता के वोट देने के अधिकार की रक्षा करने और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने जैसे गंभीर मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाया। साथ ही, नेताओं ने स्वतंत्र चुनाव प्रणाली की मांग करते हुए चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर भी अपनी आवाज बुलंद की।
लोकतंत्र और वोट के अधिकार की रक्षा ही मुख्य लक्ष्य
कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि देश का प्रधानमंत्री भारत की जनता चुनती है और इस रैली के माध्यम से ‘इंडिया’ गठबंधन यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि देश की आम जनता, कार्यकर्ता और नागरिक क्या चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि रैली में शामिल लोगों की संख्या से जनता की भावनाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है और यह आंदोलन केवल एक रैली तक सीमित न रहकर आगे भी जारी रहेगा।
वहीं, कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने भाजपा के विरोध पर पलटवार करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र है, इस देश की धरती पर हमारा भी अधिकार है और यदि व्यापारियों की चिंता थी तो रैली की अनुमति ही क्यों दी गई।
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समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने इस रैली को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य लोकतंत्र और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के दिए गए वोट के अधिकार की रक्षा करना है।
इसके साथ ही, तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) की सांसद सागरिका घोष ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोलते हुए सरकार को ‘मोदी-शाह-ज्ञानेश गठबंधन’ करार दिया और कहा कि ज्ञानेश कुमार को जनता व विपक्ष की आवाज सुननी ही होगी, जबकि पार्टी सांसद सौगत रॉय ने भी देशभर से आए लोगों द्वारा ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर एकजुट होने की बात कही।
जेएमएम सांसद महुआ माजी ने कहा है कि इंडिया गठबंधन जनता को न्याय दिलाने और उनकी आवाज उठाने के लिए पूरी तरह लोकतांत्रिक तरीके अपना रहा है। उन्होंने जोर दिया कि विपक्ष शांतिपूर्ण रास्तों से जनता की मांगें सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।
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